Cambridge IGCSE Hindi as a Second Language 0549 — 2024 Feb/March Paper 1 · Variant 0

0549/10/F/M/24 · 60 marks · ≈68 min

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Question paper16 pages

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This document has 16 pages. Any blank pages are indicated. KI/NL 326559/2 © UCLES 2024 [Turn over * 2 4 8 3 9 3 7 7 1 0 * HINDI AS A SECOND LANGUAGE 0549/01 Paper 1 Reading and Writing February/March 2024 2 hours You must answer on the question paper. No additional materials are needed. INSTRUCTIONS ● Answer all questions. ● Use a black or dark blue pen. ● Write your name, centre number and candidate number in the boxes at the top of the page. ● Write your answer to each question in the space provided. ● Do not use an erasable pen or correction fluid. ● Do not write on any bar codes. ● Dictionaries are not allowed. INFORMATION ● The total mark for this paper is 60. ● The number of marks for each question or part question is shown in brackets [ ]. Cambridge IGCSE™

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2 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 अभ््ययास 1: प्रश््न 1–6 ‘स्त्री शिक्या की अग्रदूत सयावित्रीबयाई फुले’ आलेख को ध््यया्नपूि्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश््नों के ‘स्त्री शिक्या की अग्रदूत सयावित्रीबयाई फुले’ आलेख को ध््यया्नपूि्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश््नों के उत्तर दीजिए। दीजिए। भारत के सर््वप्रथम बालिका वर्द््याि्य की संस्थाविका, सावर्त्रीबाई फुिे का जन्म 3 जनर्री सन 1831 को हुआ था। तत्कािीन सामाजजक प्रथा के अनुसार बाल््यार्स्था में ही उनका वर्र्ाह ज््योततरार् गोवर्ंदरार् फुिे के साथ हुआ। ज््योततरार् महाराष्टट्र ही नहीं बजल्क संिूर््व भारत में समाज सुधारक के रूि में जाने जाते थे। र्े सावर्त्रीबाई के संरक्षक, माग्वदर््वक और गुरु बने। उन्होंने अिनरी अलर्क्क्षत बाि-र्धू को खेतों में काम करने के साथ-साथ िढ़ना-लिखना लसखा्या और अिने ितत और उनके लमत् के प्रोत्साहन से सावर्त्रीबाई ने एक अमरीकी टीचस्व ट्रेतनंग संस्था में नामांकन करर्ा्या। बाद में िुर्े से सफिता िूर््वक लर्क्षर् कोस्व िूरा करके सन 1852 में सावर्त्रीबाई ने अिने ितत के सह्योग से एक बालिका वर्द््याि्य खोिा। प्रारंभ में वर्द््याि्य में समाज के सभरी र्गगों की कुि 9 बालिकाएँ थरीं। एक र्र््व बाद उनकी संख््या बढ़कर 150 तक िहुँच गई जो कक स्थानरी्य सरकारी वर्द््याि्य में िड़कों की संख््या से कहीं अधधक थरी। सावर्त्रीबाई संभर्त: प्रथम भारतरी्य मुख््य अध््याविका थरीं। उनके वर्द््याि्य में अंग्ेज़री स्कूिों के िाठ््यक्रम के अनुरूि गणर्त, वर्ज्ान और समाजर्ास्त् र्ालमि थे। सावर्त्रीबाई के जरीर्न का उद्देश््य ्य जस्त््यों को लर्क्क्षत बना कर समाज में समान अधधकार ददिाना, वर्धर्ा- वर्र्ाह का समथ्वन करना तथा अन््य सामाजजक कुरीतत्यों को दूर करना था। देर् की खुर्हािी और प्रगतत के लिए स्त्री का लर्क्क्षत होना िरम आर्श््यक है। उनका वर्श्र्ास था कक एक लर्क्क्षत माँ बच्चों को लर्क्क्षत बना सकतरी है। सावर्त्रीबाई मराठी की एक अग्र्री कर्त्यत्री भरी थरीं। ‘बार्न कार्री सुबोध रत्नाकर’ उनकी प्रलसद्ध रचना है। सावर्त्रीबाई को अिने संकल्ि िूतत्व में अनेक बाधाओं का सामना करना िड़ा। जब र्े स्कूि जा रही होतरी थरीं, स्त्री-लर्क्षा और समाज-सुधार-वर्रोधरी िोग उन िर ताने कसते थे। िर र्े िोगों की कटु आिोचना और तानेबाजरी की िरर्ाह ककए बबना अिने तनश्च्य िर अडिग रहीं। स्त्री-वर्मर््व को देर् की र्ैचाररक मुख््यधारा में िाने का श्े्य भरी सवर्त्रीबाई को दद्या जाता है। उन्होंने जस्त््यों को समान अधधकार ददिाने के लिए मदहिा सेर्ामंिि की स्थािना की। मंिि की सभा में सभरी र्ग्व की जस्त््याँ एक ही चटाई िर बैठतरी थरीं। सावर्त्रीबाई ने एक वर्धर्ा आश्म स्थावित कक्या जहाँ जाकर अवर्र्ादहत और वर्धर्ा जस्त््याँ अिनरी संतान को सुरक्क्षत रूि से जन्म दे सकतरी थरीं। महाराष्टट्र में सावर्त्रीबाई का जन्मददन बालिका ददर्स के रूि में मना्या जाना और िुर्े वर्श्र्वर्द््याि्य का नाम सावर्त्रीबाई फुिे िुर्े वर्श्र्वर्द््याि्य कक्या जाना स्त्री-लर्क्षा के क्षेत् में उनके ्योगदान का महोत्सर् मनाता है।

Question paper, page 3

3 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over 1 सावर्त्रीबाई फुिे ने स्त्री लर्क्षा को प्रोत्साहन देने के लिए क््या कक्या? … [1] 2 ज््योततरार् गोवर्ंदरार् फुिे की सुधारर्ादी दृजष्टट कैसे लसद्ध होतरी है? … [1] 3 बालिका वर्द््याि्य की सफिता का प्रमार् दें। … [1] 4 सावर्त्रीबाई के सुधारों िर िरम्िरार्ादी िोगों की क््या प्रततकक्र्या होतरी थरी? … [1] 5 सावर्त्रीबाई को स्त्री-कल््यार् का अग्दूत मानने के दो उदाहरर् दें? … … [2] 6 सावर्त्रीबाई की देन को कैसे ्याद कक्या जाता है। दो उदाहरर् दें। … … [2] [िूर्ाांक 8]

Question paper, page 4

4 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 अभ््ययास 2: प्रश््न 7–15 स््मयार््व गयाँि की कुंिरी ‘लयाई-फ़याई’ के बयारे ्में छपे इस लेख को ध््यया्न से पिें। प्रश््न 7 से 15 कया उत्तर दे्ने के शलए उ्नके ्नरीचे ढ़दए गए अ्नुच्छेदों (A से D) ्में से सही अ्नुच्छेद चु्न कर उसके सया्म्ने के कोष््ठक ्में सही कया न्निया्न लगयाएँ। अ्नुच्छेदों को एक से अधिक बयार चु्नया िया सकतया है। A गुजरात के अरार्िी जजिे के अकरुंि और नर्ानगर भारत के दो िहिे ऐसे स्माट्व गाँर् बन गए हैं जहाँ बबजिी की रोर्नरी के ज़ररए अंतजा्वि संबंध स्थावित करा्या जा रहा है। एक सरि सा LED बल्ब जिाने के साथ जहाँ-जहाँ उसकी रोर्नरी िहुँचरी, र्हाँ-र्हाँ अिने आि अंतजा्वि जुड़ जाता है। र्ाई-फ़ाई (Wi-Fi) की तुिना में इसमें बबजिी की खित कम होतरी है। इस तकनरीक को नाम दद्या ग्या है - िाई -फ़ाई (Li-Fi)। एक नर्ोददत संस्था ने इसकी व््यर्स्था की है। इसके तहत दोनों गाँर्ों के कई का्या्वि्यों और घरों में अंतजा्वि का उि्योग कक्या जा रहा है। बबजिी की रोर्नरी से अंतजा्वि? भिा रोर्नरी का अंतजा्वि से क््या संबंध हो सकता है, हममें से अधधकांर् व््यजक्त्यों के मन में ्यह प्रश्न उठना स्र्ाभावर्क होगा। B रोर्नरी के ज़रर्ये र्ा्यरिैस संकेत जा सकता है, ्यह वर्चार सन 2011 में एडिनबरा वर्श्र्वर्द््याि्य में मोबाइि संचार के प्रोफेसर हेरॉल्ि हैस ने एक टेि टॉक में प्रस्तुत कक्या था। उनका ्््््यउद्देश््य रोर्नरी के आधार िर काम करने र्ािी तकनरीक को वर्कलसत करना था। उनकी प््योर िाई-फ़ाई नामक एक कंिनरी भरी र्ुरू हुई जजसके तहत रोर्नरी के ज़ररए अंतजा्वि संबंध स्थावित करर्ाने र्ािे उिकरर् बनाने का लसिलसिा प्रारंभ हुआ। तब ्यही िगा था कक ्यह सब वर्श्र्वर्द््याि्यों में होने र्ािे अनधगनत प्र्योगों में से एक है और कुछ ददनों में दो-चार जगहों में चौँकाने र्ािे प्रदर््वन करने के बाद मामिा ठंिा िड़ जाएगा। िेककन ऐसा हुआ नहीं। भारत में भरी कई कंितन्याँ इस ओर काम कर रही हैं। उदाहरर् के लिए एक िच कंिनरी ने जहाँ अिनरी प्रर्ािी को ट्रू िाई-फ़ाई नाम दद्या र्हीं एक भारतरी्य कंिनरी ने प््योर िाई-फ़ाई के साथ लमिकर भारतरी्य उिभोक्ताओं को ्यह सेर्ा देनरी र्ुरू की। C रोर्नरी के ज़रर्ये िेटा के संचार िर आश्च्य्व होता है। िेककन ्यह र्ास्तर् में कोई अनहोनरी बात नहीं है। रेडि्यो तरंगों की ही तरह प्रकार् भरी तरंगों के रूि में आगे बढ़ता है। दोनों की का्य्वप्रर्ािी में कई तरह के अंतर होने के साथ कई समानताएँ भरी हैं। अल्ट्रार्ा्यिेट और इंफ्ारेि ककरर्ों का उि्योग संकेतों को िहुँचाने के लिए िहिे से कक्या जा रहा है। प्रकार् संचार के ज़रर्ये संकेतों को भेजने और िाने की अर्धारर्ा सन 1880 से ही प्रचिन में है। फाइबर ऑजप्टक नेटर्ककांग तकनरीक में तांबे के तारों के वर्कल्ि के रूि में िेटा संचार के लिए प्रकार् ककरर्ों का उि्योग होता है। ्यह तांबे के तारों र्ािे िारंिररक नेटर्क्व की तुिना में बहुत अधधक तेज़ गतत से िेटा का संचार करने में सक्षम है। र्ाई-फ़ाई नेटर्क्व में जहाँ रेडि्यो तरंगों का उि्योग होता है, र्हीं िाई-फ़ाई में प्रकार् की तरंगों का उि्योग कक्या जाता है। इसकी तरंगों की िंबाई रेडि्यो तरंगों की तुिना में कहीं अधधक होतरी है। िाई-फ़ाई के तहत अनेक बल्बों को लमिाकर एक र्ा्यरिैस नेटर्क्व तै्यार कक्या जाता है। एक दूसरा उिकरर् इन संकेतों को िेटा में बदि देता है। ्यह सारी प्रकक्र्या इंसानरी आँखों को ददखाई नहीं देतरी। D दूरदराज़ के क्षेत्ों को अंतजा्वि से जोड़ने के लिए ्यह िारंिररक र्ाई-फ़ाई की तुिना में कम खचचीिा और अधधक असरदार माध््यम वलसद्ध ् हो सकता है। इसके अततररक्त ग्ामरीर् और र्हरी िरीजजटि-वर्भाजन को िाटने के साथ ्यह भारत जैसे वर्र्ाि देर् में र्ाई-फ़ाई नेटर्क्व की माँग के दबार् का एक समाधान हो सकता है। इससे प्रत््यक्ष और िरोक्ष रोज़गार और आ्य-सृजन के अर्सर बढ़ेंगे। डिजजटि क्रांतत का अगिा िड़ार् हमारे गाँर् हो सकते हैं। िर इसकी अिनरी सरीमाएँ भरी हैं। रेडि्यो तरंगों की तुिना में प्रकार् की ्यात्ा चारों ददर्ा में होने के बजा्य एक सरीध में होतरी है। इसलिए िाई-फ़ाई आधाररत संकेत भरी दीर्ार भेद कर नहीं जा सकते हैं और र्े केर्ि र्हीं तक काम करते हैं जहाँ तक रोर्नरी जातरी है। िेककन िाई- फ़ाई की इस सरीमा में एक अच्छाई भरी है कक दीर्ारों के िार बैठा कोई व््यजक्त िाई-फ़ाई नेटर्क्व को उतनरी आसानरी से हैक नहीं कर सकता जजतनरी आसानरी से र्ह र्ाई-फ़ाई को कर सकता है। इस दृजष्टट से ्यह र्ाई-फ़ाई से अधधक सुरक्क्षत है।

Question paper, page 5

5 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over ्नरीचे ढ़दए गए िक्तव््यों (7–15) को पढ़िए तथया कोष््ठक ्में सही कया न्निया्न लगया कर बतयाइए कक कौ्न सया अ्नुच्छेद (A से D) ककस िक्तव््य से सम्बंधित है। उदयाहरण: अकरुंि और नर्ानगर भारत के स्माट्व गाँर् माने जाते हैं। A 3 B C D 7 रेडि्यो तरंग और प्रकार् की तरंग की का्य्वप्रर्ािी में कुछ समानता होते हुए भरी अंतर है। A B C D [1] 8 बबजिी के बल्ब से अंतजा्वि सम्बंध जोड़ने के प्र्यत्न िहिे भरी ककए गए थे। A B C D [1] 9 गुजरात के कुछ गाँर् बबजिी की रोर्नरी से अंतजा्वि सम्बंध स्थावित कर रहे हैं। A B C D [1] 10 र्ाई-फ़ाई के द्र्ारा अंतजा्वि की बढ़तरी हुई माँग के दबार् को िाई-फ़ाई द्र्ारा कम कक्या जा सकेगा। A B C D [1] 11 प्रकार् की तरंगें रेडि्यो तरंगों की अिेक्षा बड़री होतरी हैं। A B C D [1] 12 बबजिी की रोर्नरी से अंतजा्वि सम्बंध स्थावित करने का वर्चार वर्जस्मत करने र्ािा है। A B C D [1]

Question paper, page 6

6 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 13 िाई-फ़ाई के माध््यम से अंतजा्वि बबछाने में कई व््यार्सात्यक संस्थान सकक्र्य हैं। A B C D [1] 14 िारम्िररक र्ाई-फ़ाई की अिेक्षा िाई-फ़ाई अधधक सस्ता है। A B C D [1] 15 िाई-फ़ाई ग्ामरीर्-र्हरी जरीर्न में डिजजटि सुवर्धाओं के समान अर्सर देगा। A B C D [1] [िूर्ाांक 9]

Question paper, page 7

7 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over BLANK PAGE

Question paper, page 8

8 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 अभ््ययास 3: प्रश््न 16–19 ‘कॉफी’ के बयारे ्में न्नम््नशलखखत आलेख को ध््यया्नपूि्वक पढ़िए। कॉफी र्ब्द अरबरी भार्ा के ‘कहर्ा’ से तुककी भार्ा में ‘कहर्े’ और र्हाँ से िच भार्ा के ‘कौफी’ के माध््यम से अंग्ेज़री भार्ा में आ्या। अरबरी भार्ा में इसकी व््युत्िवति ी ‘कदह्या’ अथा्वत ‘भूख की कमरी’ से दी गई जो इस िे्य के भूख दमनकारी प्रभार् को संकेततत करतरी है। कॉफी का जन्मस्थान िािसागर के दक्क्षर्री छोर िर जस्थत ्यमन और इधथ्योवि्या की िहाडड़्याँ हैं। कॉफी के िेड़ की जानकारी का सबसे िहिा सबूत ्यमन में अहमद अि-गफ्फार के खातों में 15 र्रीं र्ताब्दी के मध््य में लमिता है। ऐसा मानना है कक इधथ्योवि्या के िठार में काल्दी नाम का एक गड़ेरर्या अिनरी बकरी चरा रहा था। अचानक कुछ बकरर्यों ने एक जंगिी िौधे की िाि बेरर्याँ चबा िीं। बेरर्याँ चबाते ही बकरर्याँ कूदने- फाँदने िगरीं। काल्दी को िगा कक बेरर्यों में कोई नर्रीिी चरीज़ है। उसने कुछ बेरर्याँ तोड़ िीं और िूरी घटना की जानकारी अिने गाँर् के िादरी को दी। िादरी ने इन्हें िानरी में उबाि कर वि्या और उनके र्रीर में फुतची भर गई। िहिे र्ह चच्व में प्राथ्वना के सम्य ऊँघने िगते थे, जबकक अब र्ह घंटों चच्व में उिदेर् देते रहते। िादरी ने िोगों को नरींद भगाने के लिए बेरर्यों को उबाि कर िरीने की सिाह दी। बाद में इधथ्योवि्या से कॉफी का चिन अरब देर्ों में िहुँचा और र्हाँ र्ह बेहद िोकवप्र्य िे्य बन ग्या। र्ुरुआत में इसकी खेतरी केर्ि ्यमन में होतरी थरी। कहर्ा र्ब्द का अथ्व र्राब है और ्यमन के सूफी संत भगर्ान में ध््यान िगाने के लिए इसका इस्तेमाि करते थे। कादहरा में एक धालम्वक वर्श्र्वर्द््याि्य के िास के कुछ घरों में इसकी खेतरी होतरी थरी। अरब देर्ों में जैसे-जैसे इसका प्रचिन बढ़ा, र्हाँ कॉफी हाउस खुिे और िोग र्हाँ बैठकर कई मसिों िर चचा्व करने, मुर्ा्यरे सुनने और र्तरंज खेिने िगे। ्ये कॉफी हाउस बौद्धधक जरीर्न का प्रतरीक बन गए और िोग मजस्जदों के बजाए कॉफी हाउस का रुख करने िगे। मक्का, कादहरा और इस्तांबुि के धालम्वक संगठनों ने इस िर प्रततबंध िगाने के प्र्यास ककए। उनका मानना था कक कॉफी हाउस म्यखानों से भरी बदतर हैं और र्े र्ड़्यंत् के अड्िे बन सकते हैं। मुराद चतुथ्व के राज में तो कॉफी हाउस जाने र्ािों के लिए कड़री सज़ा का भरी ऐिान कक्या ग्या, िेककन सारे प्र्यास वर्फि रहे और अंततः मौिवर््यों को कॉफी के सेर्न की अनुमतत देनरी िड़री। अरब िोग कॉफी की फलि्यों को उबाि कर उसका तन्या्वत करते थे, िेककन बरीज ्या िौधे ककसरी को नहीं देते थे। उन्हें िर था कक ऐसा करने से उनका कॉफी का व््यािार ठप्ि हो जाएगा। िेककन कफर भरी चोरी-तछिे कॉफी के िौधे कुछ अन््य देर्ों में िहुँचे। सर््वप्रथम मध््य िूर््व के सूफी बाबा बुदान कॉफी के सात बरीजों को अिने सरीने में बाँध कर भारतरी्य उिमहाद्र्रीि में तस्करी करके िाए थे। र्े बरीज कना्वटक की िहाडड़्यों में उगाए गए थे। िच िोग भरी इसरी तरह से कुछ िौधे िे गए और इसकी खेतरी र्ुरू कर दी। इन देर्ों में िोकवप्र्य होने के बाद कॉफी िूरे वर्श्र् में फैि गई। र्ुरुआत में ्यूरोि में कॉफी को वर्देर्री िे्य मानकर इसे संदेह की दृजष्टट से देखा जाता था। िोि क्िीमेंट अष्टटम इसकी एक प््यािी िरीकर इतने अलभभूत हो गए कक उन्होंने कहा कक इस िर वर्देलर््यों का एकाधधकार नहीं होना चादहए। मध््य िूर््व की तरह ्यूरोि में भरी कॉफी हाउस िोगों के लमिने जुिने, चचा्व करने और खेि खेिने के अड्िे बनने िगे। चाल्स्व द्वर्तरी्य ने 1675 में कहा था कक कॉफी हाउस में असंतुष्टट िोग लमिते हैं और सतिा के ण़ििाफ़ दुष्टप्रचार करते हैं।

Question paper, page 9

9 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over कॉफी के साथ सामाजजक अन््या्य की समस््या जुड़री हुई है। िगभग सारी कॉफी मुख््यतः दुतन्या के कम वर्कलसत, तनम्न-आ्य र्ािे क्षेत्ों में उगाई जातरी है। कॉफी की फलि्यों को सुखाने के बाद सूखरी फलि्यों को ककसान समृद्ध ी और वर्कलसत देर्ों को बेच देते हैं जहाँ उन्हें भूना जाता है। भूनने के बाद उसकी कीमत बढ़ जातरी है, जजसका अथ्व है कक कॉफी कम आ्य र्ािे देर्ों की अथ्व््यर्स्था का एक महत्र्िूर््व दहस्सा है, िेककन उसकी बाज़ारी कीमत ककसानों के िास र्ािस जाने के बजा्य समृद्ध ी देर्ों को लमितरी है। कॉफ़ी के मूल््य के 1 िॉिर में से केर्ि 10 सेंट उसके उत्िादक के िास जाता है और 81 सेंट उसे भूनकर तै्यार करने र्ािे देर्ों तथा बाकी का बरीच र्ािे व््यािारी के िास जाता है। साथ ही इसकी एक ि्या्वर्रर्री्य िागत भरी है। ्यदद उत्िादन र्ािे देर् में भुनाई की जाए, तो इससे फलि्यों का र्जन िगभग 15% कम हो जाएगा, जजससे िररर्हन के ज़रर्ये होने र्ािा काब्वन उत्सज्वन कम होगा।

Question paper, page 10

10 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 अभ््ययास 3: प्रश््न 16–19 ‘कॉफी’ आलेख के आियार पर ्नरीचे ढ़दए गए प्रत््येक िरीर््वक (16–19) के अंतग्वत संक्क्प्त ्नोर् शलखें। 8 [िूर्ाांक 9] अभ््ययास 4 ्में आप आलेख और अप्ने ्नोट्स के आियार पर ‘कॉफी’ िरीर््वक लेख कया सयारयांि शलखेंगे। 16 ‘कॉफी’ र्ब्द की अरबरी भार्ा से व््युत्िवति और उसका अथ्व • … • … [2] 17 कॉफी के र्ुरुआतरी उि्योग • … • … [2] 18 कॉफी की िोकवप्र्यता बढ़ने के कारर् और उनिर धालम्वक संगठनों की प्रततकक्र्याएँ • … • … • … [3] 19 कॉफी के व््यर्सा्य से लमिने र्ािे िाभ में असमानता • … • … [2]

Question paper, page 11

11 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over अभ््ययास 4: प्रश््न 20 अभ््ययास 3 के आलेख ‘कॉफी’ ्में कॉफी के उत्पयाद्न के इनतहयास, बितरी हुई लोकवप्र्यतया और उससे िुड़े सया्मयाजिक अन््यया्य कया वििरण है। अभ््ययास 3 के आलेख और अप्ने ब्नयाए ्नोट्स के आियार पर आलेख कया सयारयांि शलखें। आिका सारांर् अधधकतम 100 िब्दों में होना चादहए। आि ्यथासंभर् अप्ने िब्दों में लिखें। आिको अंति्वस्तु के शलए अधधकतम 4 अंक और सर्ीक एिं संक्क्प्त भयार्या-िैली के शलए अधधकतम 6 अंक ददए जाएँगे।

Question paper, page 12

12 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [10] [िूर्ाांक 10]

Question paper, page 13

13 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over अभ््ययास 5: प्रश््न 21 आप घू्म्ने िया रहे थे, अचया्नक बयाररि िुरु होगई। अप्ने श्मत् को ई्मेल शलखकर उस घर््नया के बयारे ्में बतयाएँ। आपके ई ्मेल ्में न्नम््नशलखखत बयातें सजम््मशलत हो्नरी चयाढ़हए: 1 आि कहाँ जा रहे थे 2 र्हाँ क््या हुआ 3 आिको कैसा िगा। आपकया ई्मेल लगभग 120 िब्दों ्में हो्नया चयाढ़हए। आिको 3 अंक अंति्वस्तु के शलए और 5 अंक सर्ीक भयार्या एिं िैली के लिए ददए जाएँगे।

Question paper, page 14

14 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [8] [िूर्ाांक 8]

Question paper, page 15

15 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 [Turn over अभ््ययास 6: प्रश््न 22 ‘व््यजक्तत्ि के सियाांगरीण विकयास के शलए पयाठ््यपुस्तकों के सयाथ ्नृत््य, संगरीत और खेलकूद भरी आिश््यक हैं।’ आि कहाँ तक इस कथन से सहमत हैं? अिने वर्चारों को समझाते हुए स्कूि िबत्का के लिए अिना िेख िगभग 200 िब्दों में लिणखए। आिका िेख वर्र््य से सम्बंधधत जानकारी िर केजन्रित होना चादहए। ऊपर दी गई ढ़र्प्पखण्ययाँ आपके लेख्न के शलए ढ़दिया प्रदया्न कर सकतरी हैं। इ्नके ्मयाध््य्म से आप अप्ने विचयारों को विस्तयार दीजिए। लिणखत प्रस्तुतत िर अंत्विस्तु के शलए 8 अंक तक और सर्ीक भयार्या िैली के लिए भरी 8 अंक तक ददए जाएँगे। … … … … … … … … … … … … … … … … … विकयास ्में सहया्यक हैं विकयास ्में बयािक हैं

Question paper, page 16

16 0549/01/F/M/24 © UCLES 2024 … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [16] [िूर्ाांक 16] Permission to reproduce items where third-party owned material protected by copyright is included has been sought and cleared where possible. Every reasonable effort has been made by the publisher (UCLES) to trace copyright holders, but if any items requiring clearance have unwittingly been included, the publisher will be pleased to make amends at the earliest possible opportunity. To avoid the issue of disclosure of answer-related information to candidates, all copyright acknowledgements are reproduced online in the Cambridge Assessment International Education Copyright Acknowledgements Booklet. This is produced for each series of examinations and is freely available to download at www.cambridgeinternational.org after the live examination series. Cambridge Assessment International Education is part of Cambridge Assessment. Cambridge Assessment is the brand name of the University of Cambridge Local Examinations Syndicate (UCLES), which is a department of the University of Cambridge.

What you needed in this session

Cambridge’s own grade thresholds for 2024 Feb/March, Paper 1 · Variant 0. A higher threshold means an easier paper — the bar moves with how the cohort did.

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C30/60
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