Cambridge IGCSE Hindi as a Second Language 0549 — 2023 Oct/Nov Paper 1 · Variant 0
0549/10/O/N/23 · 60 marks · ≈68 min
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This document has 16 pages. Any blank pages are indicated. KI 316093/3 © UCLES 2023 [Turn over HINDI AS A SECOND LANGUAGE 0549/01 Paper 1 Reading and Writing October/November 2023 2 hours You must answer on the question paper. No additional materials are needed. INSTRUCTIONS ● Answer all questions. ● Use a black or dark blue pen. ● Write your name, centre number and candidate number in the boxes at the top of the page. ● Write your answer to each question in the space provided. ● Do not use an erasable pen or correction fluid. ● Do not write on any bar codes. ● Dictionaries are not allowed. INFORMATION ● The total mark for this paper is 60. ● The number of marks for each question or part question is shown in brackets [ ]. Cambridge IGCSE™ * 3 2 9 8 8 5 6 1 3 1 *
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2 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 अभ््ययास 1: प्रश््न 1–6 ‘कम््बबोडि्यया की महिलया-चैम्म्पि्य्न’ आलेख कबो ध््यया्नपिूर््वक पिहिए और पिूछे गए प्रश््नों के उत्तर दीम्िए। कम््बबोडिया के लगभग 75 प्रतिशि लबोग ग्ामीण क्ेत्र में रहिे हैं और कृषि िथा मछली-पालन पर तनभ्भर करिे हैं। मानसून के मौसम में कम््बबोडिया का अधिकांश समिल भाग ्बाढ़ग्स्ि हबो जािा है। हाल के विषों में जलवायु के चरम स्वरूप और मौसम की अतनश््चचििा का ककसान और मछुआरों की आजीषवका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कम्पबोट जैसे िटविती प्रदेश के लगभग आिे वन नष्ट हबो गए जबो िूफानों कबो िीमा करने का काम करिे थे। वहाँ के तनवासी जबो पहले से ही जीषवि रहने के ललए संघि्भ कर रहे थे, अ्ब स्वच्छ जल, भबोजन और रहने की जगह िक से वंधचि हबो गए। ऐसी श्स्थति में ्बाहरी सहायिा लमले ब्बना एक पूरा समुदाय अपना स्ब कुछ खबो देने की आशंका से िरा हुआ था। इसका स्बसे अधिक दुष्प्रभाव श्स्त्रयों और ्बच्चों पर पड़ा। 36 वितीय हेंग, कम्पबोट में कम््बबोडिया की स्बसे ्बड़ी झील िबोनले सैप के पास रहिी है। उसका पररवार मछली- पालन पर तनभ्भर है, पर जलवायु पररवि्भन के अतिरेक ने उसकबो भबोजन जुटाने िक के ललए कर््भ लेने कबो षववश कर ददया। हेंग का कहना है कक ज्ब वह मछली पकड़कर पैसा नहीं कमा सकिी, वह अपने ्बच्चों के साथ जाकर रद्दी सामान ्बटबोरकर उसे ्बेचने से लमले पैसों से अपने ्बच्चों के ललए चावल ख़रीदिी है। पररवार की इस दयनीय दशा का प्रभाव हेंग की 11 वितीय ्बेटी पुंधथया की लशक्ा पर पड़ा। वह अपने पररवार की आधथ्भक सहायिा करने के ललए स्कूल जाने की जगह कचरा इकट््ठा करके उसे ्बेचकर कुछ पैसे ्बना लेिी है। हेंग कबो लगा कक पुंधथया के भषवष्य के ललए कुछ करना आव्चयक है। यदद पररवार की श्स्थति में थबोड़ा सा भी सुिार हबो िबो वह स्बसे पहले अपनी ्बेटी कबो लशक्ा ददलाना चाहिी है िाकक उसका जीवन उसके अपने जीवन जैसा न हबो। इस संकट की श्स्थति से ्बाहर आने के ललए कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने लमलकर ‘मदहला-चैश्म्पयन’ यबोजना प्रारंभ की। उसके अंिग्भि श्स्त्रयों कबो जलवायु-संकट का सामना करने के ललए जलवायु के अनुकूल खेिी और मछली पकड़ने की िकनीक का प्रलशक्ण ददया गया। प्रलशक्क्ि ‘मदहला-चैश्म्पयन’ ने श्स्त्रयों कबो लमलजुलकर जलवायु पररवि्भन के प्रभावों का सामना करना लसखाया और वे अपने समुदाय की मदद करने लगीं। वे उन्हें ्बिािीं कक सूखे और ्बाढ़ कबो रबोका िबो नहीं जा सकिा, पर उनकबो अपने अनुकूल ्बनाने के िरीके खबोजे जा सकिे हैं। इस यबोजना के िहि श्स्त्रयों में आत्मषव्चवास ्बढ़ा और उनकी रबोर्ी-रबोटी के सािन भी जुट गए। हेंग की 11 वितीय ्बेटी पुंधथया अ्ब स्कूल जाकर पढ़-ललखकर िॉक्टर ्बनने के सपने देख रही है िाकक वह अपने ्बीमार दादा-दादी का इलाज कर सके।
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3 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over 1 कम््बबोडिया के अधिकांश लबोग कहाँ रहिे हैं? … [1] 2 जलवायु पररवि्भन का स्बसे अधिक प्रभाव ककन पर पड़ा? … [1] 3 हेंग की आधथ्भक समस्या ्बढ़ने का कारण ललखखए। … [1] 4 पुंधथया पर आधथ्भक समस्या के 2 प्रभाव ललखखए। … … [2] 5 हेंग क्या चाहिी थी? … [1] 6 जलवायु पररवि्भन का सामना करने के ललए कौन से 2 उपाय ककए जा सकिे हैं? … … [2] [पूणाांक 8]
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4 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 अभ््ययास 2: प्रश््न 7–15 ‘त््ययं्बकेश्र्र ज््यबोतिर्लिंग’ आलेख कबो ध््यया्नपिूर््वक पिहिए और पिूछे गए प्रश््नों के उत्तर दीम्िए। A महाराष्ट्र के नालसक शहर से करी्ब 35 ककलबोमीटर की दूरी पर गौिमी नदी के ककनारे श्स्थि त्यं्बके्चवर मंददर दहन्दुओं के पषवत्र और प्रलसद्ि िीथ्भस्थलों में से एक है। भगवान लशव कबो समषप्भि यह मंददर अपनी भव्यिा के ललए पूरे भारि में प्रलसद्ि है। त्यं्बके्चवर में षवराश्जि ज्यबोतिललांग की स्बसे ्बड़ी षवशेििा यह है कक वहाँ भगवान ब्रह्मा, षवष्णु और महेश िीनों एक ही स्थान में षवराश्जि हैं। भगवान लशव के इस पुरािन मंददर से लाखों लबोगों की आस्था जुड़ी हुई है। प्रलसद्ि िीथ्भस्थल हबोने के साथ-साथ यह मंददर पुराित्व-षवशेिज्ञों कबो भी आकषि्भि करिा है। B मंददर के ज्यबोतिललांग से गौिम ऋषि और गंगा नदी की प्रलसद्ि कथा जुड़ी हुई है। उसके अनुसार प्राचीन समय में त्यं्बके्चवर में अकाल पड़ने से लबोग मरने लगे थे। लेककन विा्भ के देविा इंद्र देव, गौिम ऋषि की भश्क्ि से प्रसन्न हबोने के कारण उनके आश्रम में ही विा्भ करवािे थे। एक ्बार अन्य ऋषियों ने गौिम ऋषि पर छल से गौ हत्या का आरबोप लगा ददया एवं उनकबो अपने पापों का प्रायश््चचि करने के ललए देवी गंगा में स्नान करने कबो कहा। गौिम ऋषि ने ब्रह्मधगरर पव्भि पर जाकर भगवान लशव की क्ठबोर िपस्या की और देवी गंगा के त्यं्बके्चवर में प्रवादहि हबोने का वरदान माँगा। लेककन देवी गंगा इस शि्भ पर प्रवादहि हबोने के ललए रार्ी हुईं कक ज्ब भगवान शंकर इस स्थान पर रहेंगे, िभी वे इस स्थान पर प्रवादहि होंगी। देवी गंगा के आग्ह पर लशवजी त्यं्बके्चवर ज्यबोतिललांग के रूप में वहीं वास करने कबो िैयार हबो गए। इस िरह त्यं्बके्चवर ज्यबोतिललांग वहाँ स्वयं प्रकट हुए और गंगा नदी गौिमी नदी के रूप में वहाँ से ्बहने लगी। C इतिहासकारों के अनुसार इस प्रलसद्ि मंददर का तनमा्भण पेशवा नानासाहे्ब ने एक शि्भ में हारने पर करवाया था। मंददर में षवराश्जि लशव की प्रतिमा कबो हीरों से जड़ा गया था जबो कालांिर में षवदेलशयों ने लूट ललए। स्थापत्य कला का आक्भिक और अद्षविीय नमूना, सुंदर नक्काशी से अलंकृि और भगवान लशव कबो समषप्भि यह मंददर काले पत्थरों से ्बना हुआ है। मंददर में पूव्भ की िरफ एक ्बड़ा चौकबोर मंिप है एवं मंददर के चारों िरफ दरवार्े ्बने हुए है, मंददर के पश््चचम की िरफ ्बना हुआ दरवार्ा षवशेि अवसरों पर ही खबोला जािा है। अन्य ददनों में लसफ्भ िीन द्वारों से ही भक्िजन इस मंददर में दश्भन के ललए प्रवेश कर सकिे हैं। इस प्राचीन मंददर के लशखर में सुंदर स्वण्भ कलश और भगवान लशव की प्रतिमा के पास हीरों और रत्नों से जड़ा मुकुट रखा हुआ है। मंददर के गभ्भगृह में प्रवेश करने के ्बाद एक छबोटे से गड््ढे में िीन छबोटे-छबोटे ललंग ददखाई देिे हैं जबो कक ब्रह्मा, षवष्णु और महेश के अविार माने जािे हैं। त्यं्बके्चवर मंददर के पास िीन पव्भि श्स्थि हैं, श्जन्हें नीलधगरर, ब्रह्मधगरर, और गंगाद्वार के नाम से जाना जािा है। इस मंददर के गंगा द्वार पर देवी गंगा का मंददर ्बना हुआ है। त्यं्बके्चवर मंददर में स्थाषपि लशव जी की मूति्भ के चरणों से ्बूंद-्बूंद करके जल टपकिा रहिा है, जबो कक मंददर के पास में ्बने एक कुंि में एकबत्रि हबोिा है। D त्यं्बके्चवर मंददर में रुद्रालभिेक एवं कुछ षवशेि पूजा करवाने का भी अपना अलग महत्व है। इस मंददर में भक्िजन दबोि-शांति एवं स्वस्थ-जीवन के ललए महामृत्युंजय का पा्ठ करिे हैं। इसके अलावा यहाँ गाय कबो हरा चारा खखलाने का षवशेि महत्व है। भगवान लशव के 12 ज्यबोतिललांगों में से एक त्यं्बके्चवर मंददर के प्रमुख आक्भिणों में कालाराम मंददर, मुश्क्ििाम मंददर, पंचवटी, पांिवलेनी गुफाएँ, इगिपुरी आदद हैं। त्यं्बके्चवर ज्यबोतिललांग के दश्भन के ललए हर साल लाखों की संख्या में भक्िजन आिे हैं। इस पषवत्र िाम में यात्री रेल, सड़क और वायु िीनों मागषों द्वारा आसानी से पहुँच सकिे हैं। स्बसे पास का हवाईअड्िा, नालसक एयरपबोट्भ है जबो कक करी्ब 31 ककलबोमीटर की दूरी पर है एवं तनकटिम रेलवे स्टेशन नालसक रेलवे स्टेशन है जहाँ से टैक्सी या कफर ्बस के द्वारा आप त्यं्बके्चवर आसानी से पहुँच सकिे हैं।
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5 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over ्नीचे हदए गए प्रश््नों (7–15) के उत्तर दे्ने के र्लए उ्नके ्नीचे हदए गए अ्नुच्छेदों (A से D) में से सिी अ्नुच्छेद चु्न कर उसके सयाम्ने के कबोष््ठक में सिी कया त्नशया्न लगया कर ्बियाएँ कक कौ्न सया अ्नुच्छेद ककस र्क्िव््य से सम््बयंधिि िै। अ्नुच्छेदों कबो एक से अधिक ्बयार चु्नया िया सकिया िै। उदयािरण: त्यं्बके्चवर ज्यबोति्भललंग मंददर प्राचीन काल में ्बना था। A B C D 7 एक शि्भ हारने के कारण यह मंददर ्बनवाया गया था। A B C D [1] 8 मंददर के पास ्बहने वाली नदी के ्बारे में एक पौराखणक कथा प्रचललि है। A B C D [1] 9 त्यं्बके्चवर मंददर में ब्रह्मा, षवष्णु और महेश िीनों देविाओं की मान्यिा है। A B C D [1] 10 भक्िजन अपनी मनबोकामना की पूति्भ के ललए वहाँ षवशेि पूजा करवािे हैं। A B C D [1] 11 मंददर में प्रवेश करने के चार द्वार हैं। A B C D [1] 12 दश्भनाधथ्भयों के ललए मंददर िक पहुँचने के ललए यािायाि की सुषविाएँ उपलब्ि हैं। A B C D [1] 13 मंददर के पास िीन पव्भि हैं। A B C D [1]
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6 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 14 गौिम ऋषि के कारण गंगा नदी वहाँ गौिमी नदी के नाम से जानी जािी है। A B C D [1] 15 मंददर में भगवान की रत्नजडड़ि मूति्भ उस काल की स्थापत्य कला का श्रेष््ठ उदाहरण है। A B C D [1] [पूणाांक 9]
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7 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over BLANK PAGE
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8 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 अभ््ययास 3: प्रश््न 16–19 ‘भयारि की प्रथम महिलया िॉक््टर, आ्नयंदी्बयाई िबोशी’ के ्बयारे में त्नम््नर्लखखि आलेख कबो ध््यया्नपिूर््वक पिहिए। 31 माच्भ 1865 कबो पुणे शहर में जन्मी, आनंदी्बाई जबोशी धचककत्सा की डिग्ी प्राप्ि करने वाली प्रथम भारिीय मदहला थीं। श्जस समय मदहलाओं की लशक्ा भी दूभर थी, ऐसे में षवदेश जाकर धचककत्सा की डिग्ी हालसल करना अपने-आप में एक उदाहरण है। उनका षववाह कच्ची उम्र में उनसे करी्ब 20 साल ्बड़े गबोपालराव से हबो गया था और छबोटी उम्र में ही वे माँ ्बन गईं। कम उम्र में प्रसूति हबोने के कारण उन्हें कई कद्ठनाइयों का सामना करना पड़ा श्जसके ्बाद उन्होंने यह प्रण ककया कक वे एक ददन िॉक्टर ्बनेंगी और भषवष्य में प्रसूति की पूरी प्रकरिया कबो सुरक्क्ि ्बनाएँगीं। गबोपालराव ने आनंदी्बाई कबो धचककत्सा का अध्ययन करने के ललए प्रबोत्सादहि ककया। 1880 में उन्होंने एक प्रलसद्ि अमरीकी लमशनरी, रॉयल वाइल्िर कबो एक पत्र भेजा, श्जसमें उन्होंने धचककत्सा के अध्ययन में आनंदी्बाई की रूधच के ्बारे में ्बिाया और अमरीका में उनके रहने के ललए एक उपयुक्ि स्थान के ्बारे में पूछिाछ की। वाइल्िर ने उनका पत्र षप्रंसटन की लमशनरी समीक्ा में प्रकालशि ककया। न्यू जसती तनवासी थॉडिसीया कापपेन्टर नामक मदहला ने अपने दंि-धचककत्सक के ललए इंिजार करिे समय वह पत्र पढ़ा। धचककत्सा के अध्ययन करने के ललए आनंदी्बाई की इच्छा और उनके प्रगतिशील षवचारों वाले स्त्री-लशक्ा के पक्िर पति के समथ्भन से प्रभाषवि हबोकर उन्होंने उनके ललए अमरीका में रहने की व्यवस्था की। 1883 में गबोपालराव ने धचककत्सा के अध्ययन के ललए आनंदी्बाई कबो अमरीका भेजने का फैसला ककया और उन्हें अपनी पहचान ्बनाने और उच्च लशक्ा के ललए अन्य मदहलाओं के ललए उदाहरण ्बनने के ललए प्रेररि ककया। िॉ थॉ्बबोन्भ के सुझाव पर आनंदी्बाई कबो दुतनया के दूसरे मदहला धचककत्सा कॉलेज, पेंलसल्वेतनया के षवमेंस मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लमला। एक षववादहि दहंदू स्त्री के पश््चचम में धचककत्सा-लशक्ा प्राप्ि करने की आनंदी्बाई की यबोजना की सूचना का ित्कालीन रूदढ़वादी समाज ने ्बहुि दृढ़िा से षवरबोि ककया। लेककन आनंदी्बाई एक दृढ़तन्चचयी मदहला थीं और उनके पति उनकबो पूरा सहयबोग दे रहे थे। उन्होंने आलबोचनाओं की ितनक भी परवाह नहीं की। अमरीका जाने से पहले अपने भािण में भारि में मदहला िॉक्टरों के अभाव पर धचंिा व्यक्ि करिे हुए उन्होंने इस अभाव की पूति्भ करने का संकल्प ललया और भारि में मदहलाओं के ललए एक मेडिकल कॉलेज खबोलने के अपने लक्षय के ्बारे में ्बाि की। सन 1883 में आनंदी्बाई ने पानी के जहार् द्वारा कबोलकािा से न्यूयॉक्भ की यात्रा की। वहाँ पहुँचकर उन्होंने 19 वि्भ की उम्र में धचककत्सा-प्रलशक्ण शुरू ककया। अमरीका में ्ठंिे मौसम और अपररधचि आहार के कारण उनका स्वास््थ्य खरा्ब हबो कर उन्हें िपेददक हबो गया था कफर भी उन्होंने 1885 में धचककत्सा की डिग्ी हालसल की। उनके शबोि का षविय ‘दहंदुओं के ्बीच प्रसूति’ था। परीक्ा में सफलिा पर महारानी षवक्टबोररया और लबोकमान्य ्बाल गंगािर तिलक ने उन्हें ्बिाई-संदेश भेजे थे। आनंदी्बाई जबोशी का जीवन मदहलाओं के ललए धचककत्सा शास्त्र का अध्ययन करने के ललए प्रेरणास्बोि है। सन 1886 के अंि में, भारि लौटने पर आनंदी्बाई का भव्य स्वागि हुआ। कबोल्हापुर की ररयासि ने उन्हें स्थानीय अल््बट्भ एिवि्भ अस्पिाल की धचककत्सा प्रभारी के रूप में तनयुक्ि ककया। 1888 में अमरीका में नारी- षवमश्भ की चचा्भ में उनका नाम उद्िृि ककया गया। दूरदश्भन, पर उनके जीवन पर आिाररि ‘आनंदी गबोपाल’ नाम की एक दहंदी श्रृंखला प्रसाररि हुई। श्रीकृष्ण जनाद्भन जबोशी ने मरा्ठी भािा में उनके जीवन पर आिाररि उपन्यास ‘आनंदी गबोपाल’ ललखा और उसकबो नाटक में रूपांिररि ककया। िॉ. अंजलल कीि्भन ने िॉ. आनंदी्बाई जबोशी के जीवन पर ्बड़े पैमाने पर शबोि ककया और उनके समय और उपलश्ब्ियों के ्बारे में एक मरा्ठी पुस्िक ‘िॉ. आनंदी्बाई जबोशी काळ आखण किृ्भत्व’ ललखी। इसमें िॉ. आनंदी्बाई जबोशी की दुल्भ िस्वीरें भी हैं। लखनऊ के एक गैर-सरकारी संग्ठन के िहि भारि में धचककत्सा षवज्ञान कबो आगे ्बढ़ाने के ललए उनके शुरुआिी यबोगदान के सम्मान में आनंदी्बाई जबोशी धचककत्सा पुरस्कार ददया जािा है और महाराष्ट्र सरकार Ʈारा मदहलाओं के स्वास््थ्य पर काम करने वाली युवा मदहलाओं के ललए उनके नाम पर एक लशक्ावृषति दी जािी है। उनके सम्मान में शुरि ग्ह पर एक गड््ढे का नाम ‘जबोशी’ रखा गया है। 31 माच्भ 2018 कबो, गूगल ने उनकी 153वीं जयंिी के उपलक्षय में उन्हें ‘गूगल िूिल’ से सम्मातनि ककया। 2019 में, मरा्ठी में उनके जीवन पर एक कफल्म ‘आनंदी गबोपाल’ नाम से ्बनाई गई है। उनकी असली षवरासि वे असंख्य मदहला िॉक्टर हैं जबो पूरी लगन और प्रति्बद्ििा से धचककत्सा-जगि में काय्भरि हैं।
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9 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over अभ््ययास 3: प्रश््न 16–19 ‘भयारि की प्रथम महिलया िॉक््टर, आ्नयंदी्बयाई िबोशी’ आलेख के आियार पिर ्नीचे हदए गए प्रत््येक शीर््वक (16–19) के अयंिग्वि सयंक्षिप्ि ्नबो्ट र्लखें। 8 [पूणाांक 9] अभ््ययास 4 में आपि आलेख और अपि्ने ्नबोट्स के आियार पिर ‘भयारि की प्रथम महिलया िॉक््टर, आ्नयंदी्बयाई िबोशी’ शीर््वक लेख कया सयारयायंश र्लखेंगे। 16 प्रारंलभक जीवन • … • … • … [3] 17 धचककत्सा शास्त्र की लशक्ा में कद्ठनाइयाँ और गबोपालराव का सहयबोग • … • … • … [3] 18 भारि वापसी • … [1] 19 िॉ आनंदी्बाई की देन • … • … [2]
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10 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 अभ््ययास 4: प्रश््न 20 अभ््ययास 3 के आलेख ‘भयारि की प्रथम महिलया िॉक््टर, आ्नयंदी्बयाई िबोशी’ में ्बयाल-वर्र्याि और स्त्ी र्शषिया के प्रति सयामयाम्िक रूहि्यों के ्बयार्िूद गबोपियालरयार् के प्रगतिशील वर्चयार और आ्नयंदी्बयाई के दृिसयंकल्पि िथया उ्नकी वर्रयासि की प्रेरक कथया िै। अभ््ययास 3 के आलेख और अपि्ने ्ब्नयाए ्नबोट्स के आियार पिर आलेख कया सयारयायंश र्लखें। आपका सारांश अधिकिम 100 शब्दों में हबोना चादहए। आप यथासंभव अपि्ने शब्दों में ललखें। आपकबो अयंिर््वस्िु के र्लए अधिकिम 4 अंक और स्टीक एर्यं सयंक्षिप्ि भयार्या-शैली के र्लए अधिकिम 6 अंक ददए जाएँगे।
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11 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [10] [पूणाांक 10]
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12 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 अभ््ययास 5: प्रश््न 21 आपिके मबोिल्ले में एक ्न्यया ख़रीदयारी केंद्र खुल्ने र्यालया िै। ्नगरपियार्लकया के ्नयाम एक पित् द्र्यारया अपि्ने सुझयार् दें। आपिके पित् में त्नम््नर्लखखि ्बयािें सम्म्मर्लि िबो्नी चयाहिए: 1 हर उम्र के ललए आकि्भण 2 कार पाक्भ की सुषविा 3 षवलभन्न प्रकार की दुकानें। आपिकया ्नबो्ट लगभग 120 शब्दों में िबो्नया चयाहिए। आपकबो 3 अंक अयंिर््वस्िु के र्लए और 5 अंक स्टीक भयार्या एर्यं शैली के ललए ददए जाएँगे।
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13 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [8] [पूणाांक 8]
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14 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 अभ््ययास 6: प्रश््न 22 ‘ि्न ग्यया, कुछ ्निीयं ग्यया, स्र्यास््थ््य ग्यया िबो स्ब कुछ ग्यया।’ आप कहाँ िक इस मि से सहमि हैं? अपने षवचारों कबो समझािे हुए स्कूल पबत्रका के ललए अपना लेख लगभग 200 शब्दों में ललखखए। आपका लेख षविय से सम््बंधिि जानकारी पर केश्न्द्रि हबोना चादहए। ऊपिर दी गई ह्टप्पिखण्ययाँ आपिके लेख्न के र्लए हदशया प्रदया्न कर सकिी िैं। इ्नके मयाध््यम से आपि अपि्ने वर्चयारों कबो वर्स्ियार दीम्िए। ललखखि प्रस्िुति पर अयंि्वर्स्िु के ललए 8 अंक िक और स्टीक भयार्या के ललए भी 8 अंक िक ददए जाएँगे। … … … … … … … … … … … … … … … … … … स्वास््थ्य स्बसे ्बड़ा िन पेट भरने के ललए पैसा चादहए
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15 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [16] [पूणाांक 16]
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16 0549/01/O/N/23 © UCLES 2023 Permission to reproduce items where third-party owned material protected by copyright is included has been sought and cleared where possible. Every reasonable effort has been made by the publisher (UCLES) to trace copyright holders, but if any items requiring clearance have unwittingly been included, the publisher will be pleased to make amends at the earliest possible opportunity. To avoid the issue of disclosure of answer-related information to candidates, all copyright acknowledgements are reproduced online in the Cambridge Assessment International Education Copyright Acknowledgements Booklet. This is produced for each series of examinations and is freely available to download at www.cambridgeinternational.org after the live examination series. Cambridge Assessment International Education is part of Cambridge Assessment. Cambridge Assessment is the brand name of the University of Cambridge Local Examinations Syndicate (UCLES), which is a department of the University of Cambridge. BLANK PAGE
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