Cambridge IGCSE Hindi as a Second Language 0549 — 2022 Oct/Nov Paper 1 · Variant 0

0549/10/O/N/22 · 60 marks · ≈68 min

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This document has 16 pages. Any blank pages are indicated. KI 303589/2 © UCLES 2022 [Turn over HINDI AS A SECOND LANGUAGE 0549/01 Paper 1 Reading and Writing October/November 2022 2 hours You must answer on the question paper. No additional materials are needed. INSTRUCTIONS ● Answer all questions. ● Use a black or dark blue pen. ● Write your name, centre number and candidate number in the boxes at the top of the page. ● Write your answer to each question in the space provided. ● Do not use an erasable pen or correction fluid. ● Do not write on any bar codes. ● Dictionaries are not allowed. INFORMATION ● The total mark for this paper is 60. ● The number of marks for each question or part question is shown in brackets [ ]. Cambridge IGCSE™ * 1 4 2 3 9 0 4 7 7 2 *

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2 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 अभ्यास 1: प्रश्न 1–6 ‘हल्दी’ आलेख को ध्या्नपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत् तर ्दीजिए। अरुणाचल प्रदेश में एक ककसान कुदाली से ज़मीन खोद रहा था। भूरी ममट्ी के अंदर केसररया रंग की झलक देखकर उसके चेहरे पर संतोष की मुसकुराह् खखल गई। उसने हहमालय की नीली पृष्ठभूमम में चमकता हुआ जड़ का एक ग्ठीला ्ुकड़ा उ्ठाया - ताज़ी हलदी की गाँ्ठ! भारतीय रसोई में इसका महत्वपूण्ण सथान है। खाने के वयंजनों में आकष्णक पीला रंग हलदी से ही ममलता है। इसके अततररकत ताज़ी हलदी को अदरक की तरह भी खाते हैं। हलदी दक्षिण-पू्व्ण एमशया की ्वनसपतत है। अदरक की प्रजातत के 5-6 फु् तक लम्े पौधे की जड़ में हलदी लगती है। इसके पत ते केले के पत तों के आकार के होते हैं और अगसत के महीने में श्वेत-हररत रंग के अतयंत आकष्णक फूल खखलते हैं। हलदी की गाँ्ठ तैयार होने पर ज़मीन से तनकाल कर उ्लते हुए पानी में धोकर धूप में सुखा दी जाती है। पूरी तरह से सूखने पर उसको महीन पीसा जाता है। पुराने समय में इसका उपयोग रंग चढ़ाने के मलए भी ककया जाता था। खाने का स्वाद ्ढ़ाने के अला्वा इसका उपयोग त्वचा की चमक ्ढ़ाने के मलए उ््न से लेकर अनेक प्रकार की सौंदय्ण-्वध्णक-क्ीमों में ककया जाता है। व्व्वाह आहद मांगमलक अ्वसरों पर हलदी का व्वशेष महत्व है। हहंदू व्व्वाह पƨतत में व्व्वाह के पहले हदन भा्वी ्वर और ्वधू को मांगमलक हलदी का उ््न लगाने की प्रथा है जजसको उत तर भारत में ‘हलदी चढ़ाना’ और ्ंगाल में ‘गाए होलूद’ कहते हैं। ऐसी मानयता है कक हलदी के लेप से उनकी त्वचा पर अदव्वतीय कांतत आती है। तममलनाडु और आंध्रप्रदेश में हलदी की गाँ्ठ को मौली में ्ाँधकर दुलहन के गले में उसकी माला पहनाते हैं और मरा्ठी और कोंकणी समाज में यह ्वर-्वधू की कलाई में ्ाँधी जाती है। प्राचीन औषध-ग्ंथों में इसका उललेख हररद्ा, हरदल आहद नाम से ममलता है। आयु्ववेद और पारमपररक चीनी औषधध में हज़ारों ्वषषों से इसका उपयोग होता आ रहा है। आधुतनक युग में ्वैज्ातनकों के शोध के पररणाम स्वरूप हलदी के औषधीय गुणों को प्रामाखणकता ममली है। हलदी के भीतर सकक्य रसायन करकयूममन में शरीर के भीतर की सूजन और ्ाहरी चो् का उपचार करने के गुण पाए जाते हैं। करकयूममन से हॉरमोन में ्ढ़ोतरी होने के पररणामस्वरूप व्वषाद जैसे मानमसक व्वकार के उपचार में भी इसका उपयोग लाभदायक माना गया है। सददी, ज़ुकाम, खाँसी सहहत अनेक रोगों के उपचार में लाभदायक होने के साथ उसके से्वन से स्वास्थय पर कोई दुषप्रभा्व पड़ने की संभा्वना नहीं होने के कारण संसार के प्राकृततक धचककतसा प्रेममयों में हलदी की लोकवप्रयता ्ढ़ी है। ्वैज्ातनक शोध के पररणाम स्वरूप हलदी अ् मसालदान की सीमा से ्ाहर आकर एक ‘सूपर फ़ूड’ मानी जा रही है।

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3 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over 1 भोजन के वयंजनों में हलदी से ककस प्रभा्व में ्वृजƨ होती है? … [1] 2 पौधे के ककस भाग से हलदी तनकलती है? … [1] 3 ्वै्वाहहक अ्वसर पर हलदी के उपयोग के ्ो कारण कया हैं? … … [2] 4 हलदी के ककस तत्व में रोगों के इलाज करने के गुण पाए जाते हैं? … [1] 5 हलदी को द्वा के रूप में मानयता कयों ममली? … [1] 6 हलदी की लोकवप्रयता ्ढ़ने के ्ो कारण दीजजए। … … [2] [पूणाांक 8]

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4 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 अभ्यास 2: प्रश्न 7–15 ‘सकयारयात््मक दृज्टिकोण और ्नेतृत्र’ के बयारे ्में छपे इस लेख को ध्या्न से पिें। प्रश्न 7 से 15 कया उत्तर ्े्ने के ललए उ्नके ्नीचे ढ़्ए गए अ्नुचछे्ों (A से D) ्में से सहदी अ्नुचछे् चु्न कर उसके सया्म्ने के को््ठक ्में सहदी कया न्नशया्न लगयाएँ। अ्नुचछे्ों को एक से अधिक बयार चु्नया िया सकतया है। A सकारातमक दृजष्कोण, सफलता और प्रसननता में घतनष्ठ सं्ंध है। सफलता प्राज्त के मलए प्रयतन करना ज़रूरी है। ज् हम सफल होते हैं तो प्रसननता स्वाभाव्वक होती है और सकारातमक दृजष् और प्रसननता के साथ ककए गए प्रयतन से सफलता की संभा्वना में ्वृजƨ होती है। इसमलए यह कहना कह्ठन है कक सकारातमकता, प्रसनन मन और प्रयतन करने में स्से अधधक महत्वपूण्ण कया है। चररत्र के ्वांछनीय गुणों में ऊजा्ण, सकक्यता, सृजनातमक शजकत और आतमव्वश्वास के साथ सकारातमकता की गणना भी की जाती है। जी्वन में सकारातमक दृजष्कोण ्नाए रखना जजतना आ्वशयक है उतना ही कह्ठन भी। कह्ठन समय आने पर धैय्ण रखने के मलए ज़रूरी है कक वयजकत स्वयं को दोष देने के ्जाय अपने प्रतत सदय रहे। कह्ठनाइयों से घ्राने की जगह उसे यह कलपना करनी चाहहए कक उनसे उ्रने के ्ाद ्वह पहले की अपेषिा ककतना अधधक शजकतशाली हो जाएगा। B व्वश्व के इततहास में शायद ही ऐसा कोई महान वयजकत हुआ होगा जजसको कह्ठन और सतत प्रयतन ककए ब्ना सफलता ममली हो। ऐसी कौन सी व्वशेषताएँ हैं जो सामानय वयजकत को अपने षिेत्र का नेतृत्व करने की षिमता देती हैं? इस षिमता को व्वकमसत करने के मलए कुशाग्ता, अव्वचलता, सुदृढ़ता, आतम- अनुशासन और दूरदमश्णता आ्वशयक हैं पर यथेष् नहीं। इन स्के होने के साथ और स्से अधधक महत्वपूण्ण है भा्वनातमक समानुभूतत की षिमता। भा्वनातमक समानुभूतत, अथा्णत स्वयं को दूसरों की जगह रखकर देखना, उनकी भा्वना को तीव्रता से अनुभ्व करना मानों ्वे स्वयं उनकी अपनी भा्वना हो। फांसीसी साहहतय में भा्वनातमक समानुभूतत का एक उतकृष् उदाहरण प्रमसदध उपनयासकार गुसता्व फलॉ्ेयर हैं। ज् ्वे अपने उपनयास ‘मदाम ्ो्वरी’ में उपनयास की नातयका मदाम ्ो्वरी के व्वष खाने का दृशय मलख रहे थे, ्वे नातयका की व्वषणण मन:जसथतत के साथ इस कदर आतमसात हो गए थे कक उनके अपने शरीर में व्वष के लषिण पाए गए थे। भा्वनातमक समानुभूतत का यह चरम उदाहरण है और के्वल लेखक की सफलता की कसौ्ी ही नहीं, ्जलक हर महान नेता का आ्वशयक गुण भी है। C सफलता पाने के मलए कोई एक सरल रासता नहीं होता। सफल वयजकत दैतनक जी्वन की साधारण सी लगने ्वाली घ्ना से जीने के मसƨांत सीख लेता है। गूगल के सीईओ सुंदर वपचाई की गणना व्वश्व के दस अतयंत सफल भारतीयों में की जाती है। उनके जी्वन से अनेक प्रेरणादायक कहातनयाँ जुड़ी हैं। उनमें से एक प्रसंग एक ततलच्ा और महहला का है जजसके उदाहरण से सुंदर वपचाई ने आतमव्वकास के मसदधांत की वयाखया की है। एक रेसतरॉ में एक ततलच्ा कहीं से उड़कर आया और ्वहाँ ्ै्ठी महहला के ऊपर ्ै्ठ गया। महहला ने आतंककत होकर काँपती हुई आ्वाज़ में धचललाना और ततलच्े को भगाने के मलए हाथ-पैर मारना शुरू ककया। उनके साथ ्ै्ठे लोग भी घ्रा गए। महहला को घ्राते देख कर रैसत्रां का ्ैरा उनकी सहायता करने के मलए गया। अंत में महहला ने ककसी तरह ततलच्े को अपने कपड़ों पर से तछ्का कर ह्ाया, पर ्वह अपने पंख फड़फड़ाते हुए उड़कर सामने खड़े ्ैरे की ्वददी पर ्ै्ठ गया। ्ैरे ने ततलच्े की गततव्वधध को कुछ षिण के मलए गौर से देखा और ज् ्वह जसथर हो गया उसको धीरे से पकड़ कर रैसत्रां के ्ाहर फेंक हदया। D कया महहला के ना्कीय वय्वहार का जज़ममे्वार ्वह ततलच्ा था? यहद यह सच है तो ्ैरे का वय्वहार उससे मभनन कयों था? सुंदर वपचाई के अनुसार एक ही जसथतत में दो अलग तरह के ्ता्ण्व वयजकत की मानमसकता के पररचायक हैं। महहला के वय्वहार में ब्ना पू्व्ण व्वचार की जाने ्वाली, ह्ठात प्रततकक्या और ्ैरे के वय्वहार में जसथतत को मानमसक रूप से जाँच कर व्वचारपूण्ण अनुकक्या देने का उदाहरण है। प्रततकक्या सहज, व्वचारहीन और तातकामलक होती है पर अनुकक्या सोच समझ कर की जाने के कारण व्वचाररत और व्व्वेकपूण्ण होती है। सफलता के रहसय को समझने के मलए यह एक सुंदर उदाहरण है।

Question paper, page 5

5 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over ्नीचे ढ़्ए गए प्रश्नों (7–15) के उत् तर ्े्ने के ललए उ्नके ्नीचे ढ़्ए गए अ्नुचछे्ों (A से D) ्में से सहदी अ्नुचछे् चु्न कर उसके सया्म्ने के को््ठक ्में सहदी कया न्नशया्न लगया कर बतयाएँ कक कौ्न सया अ्नुचछे् ककस रकतव् से समबबंधित है। अ्नुचछे्ों को एक से अधिक बयार चु्नया िया सकतया है। उ्याहरण: ‘सुंदर वपचाई’ गूगल के सीईओ हैं। A B C  D 7 सफल वयजकत आशा्वादी होते हैं। A B C D [1] 8 दूसरों की भा्वना को समझने की सहृदयता रचनाकार के मलए एक ्वांछनीय गुण है। A B C D [1] 9 मभनन-मभनन वय्वहार का कारण लोगों की मनोदशा होती है। A B C D [1] 10 सफलता पाने के मलए मेहनत करना ज़रूरी होता है। A B C D [1] 11 आम सी घ्ना से ्ड़ी सीख ले लेना सफलता की कुंजी है। A B C D [1] 12 समसया आने पर स्वयं को दोष देना अनुधचत है। A B C D [1] 13 कह्ठनाइयों का सामना करके वयजकतत्व में सुदृढ़ता आती है। A B C D [1]

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6 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 14 व्वचारशीलता सोच-व्वचार कर समसया का समाधान करना है। A B C D [1] 15 जी्वन में हमेशा सकारातमक मानमसकता ्नाए रखना सरल नहीं होता। A B C D [1] [पूणाांक 9]

Question paper, page 7

7 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over BLANK PAGE

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8 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 अभ्यास 3: प्रश्न 16–19 ‘पेंच रया्ट्दी् उद्या्न’ के बयारे ्में न्नम्नललखखत आलेख को ध्या्नपूर्वक पढ़िए। मधयप्रदेश के मस्वनी और तछंद्वाड़ा जजलों में जसथत पेंच भारत का एक प्रमुख राषट्ीय उदयान है। उसका नामकरण उसको दो भागों में ्ां्ने ्वाली पेंच नदी के नाम पर हुआ। यह नदी उदयान के ्ीचों्ीच उत तर से दक्षिण की ओर ्हती है। रडयाड्ण ककपमलंग की भारत के जंगलों पर आधाररत ‘दी जंगल ्ुक’ की कथाएँ पेंच उदयान की पृष्ठभूमम में मलखी गई थीं। उसके प्रमुख पात्र मोगली के नाम पर पेंच राषट्ीय उदयान ‘मोगली लैणड’ के नाम से भी जाना जाता है। सन् 2002 में भारत की भूतपू्व्ण प्रधान मंत्री की समृतत में इस उदयान का नाम ्दलकर इंहदरा वप्रयदमश्णनी पेंच राषट्ीय उदयान रख हदया गया। सतपुड़ा की प्व्णतमाला की दक्षिणी तलह्ी में जसथत पेंच राषट्ीय उदयान को ्ाघ संरषिण योजना के तहत 23 न्वम्र 1992 में ्ाघ अभयारणय घोवषत ककया जाने के ्ाद देश का स्व्णश्ेष्ठ ्ाघ अभयारणय होने का गौर्व प्रा्त हुआ। इसके ्ाद से ही इस षिेत्र में ्वनय-जी्वों की संखया में तेज़ी से ्ढ़ोतरी होने लगी। जैसे-जैसे इसकी खयातत ्ढ़ी देश-व्वदेश के पय्ण्कों के आगमन का क्म भी ्ढ़ गया। ्वनसपतत और जी्वजंतुओं को उनके प्राकृततक परर्वेश में देखने के इचछुक पय्ण्कों के मलए यह एक लोकवप्रय उदयान है। अनेक दुल्णभ ्वनय-जी्वों और पय्ण्न की सुव्वधाओं से युकत पेंच राषट्ीय उदयान पय्ण्कों को ्हुत तेज़ी से आकवष्णत कर रहा है। प्रतत ्वष्ण शीत ऋतु में ्फफीले षिेत्रों के लगभग 210 देसी और प्र्वासी प्रजाततयों के पषिी भोजन और प्रजनन के मलए आकर यहाँ ्सेरा करते हैं। देशभर में तेज़ी से व्वलु्त होते जा रहे धगदध तथा अनय पषिी यहाँ ्हुतायत से पाए जाते हैं। खू्सूरत झीलें, सागौन के ऊँचे पेड़ों के सघन झुरमु्, अनोखे रंगब्रंगे पक्षियों के कलर्व, शीतल ह्वा के झोंके, महकती मम͠ी की सोंधी सुगंध और ्वनय-जी्वों का अनू्ठा संसार पय्ण्कों के रोम-रोम में मसहरन भर देता है। पलक झपकते ही हदखने और आँख से ओझल हो जाने ्वाले चीतल, साँभर, तीन सींग्वाली नीलगाय, भृकु्ी ताने जंगली भैंसे, काले हररण, लकड़्गघा, उड़ने्वाली धगलहरी, मसयार और लगभग 65 प्रमसƨ ्ंगाल ्ाइगर का यह प्राकृततक आ्वास है। अंतरा्णषट्ीय जल-व्वदयुत पररयोजना के अंतग्णत तोतलाडोह ्ाँध ्नने से राषट्ीय उदयान के मधय भाग में एक व्वशाल झील ्न गई है। यह ्वनय-जी्वों के मलए पानी की ज़रूरत पूरी करने के साथ ही मछमलयों की पचास प्रजाततयों, उभयचर जंतुओं सारस आहद को आश्य देकर उदयान की प्राकृततक शोभा में ्वृजƨ करती है। उदयान ्रसात का मौसम समा्त होने पर 1 अकतू्र से 30 जून तक पय्ण्कों के मलए खुला रहता है। प्राकृततक सौंदय्ण प्रचुरता से देखने के मलए न्वम्र से फर्वरी के महीनें स्से अचछे होते हैं। उस समय सागौन, महुआ और ्ाँस की सघन हररयाली के नीचे अतनयंबत्रत झाड़-झंखाड़, औषधीय महत्व के दुल्णभ पौधों की हज़ार से ऊपर प्रजाततयाँ और उनके ऊपर मंडराती रंग-ब्रंगी तततमलयाँ मन को मोह लेती हैं। लेककन ्वृषिों के झुरमु् में तछपे ्ाघ को ढ़ूंढना मुजशकल होता है। ्ाघ देखने के मलए माच्ण और अप्रेल के महीने अधधक उपयुकत होते हैं कयोंकक गममी से झुलसी ्वनसपतत जंगल की सघनता को कुछ कम कर देती है और गममी से परेशान ्ाघ पानी पीने के मलए या ्ठणडक की खोज में कई ्ार झील के पास जाता है। ऐसे में उसको देख पाने की संभा्वना ्ढ़ जाती है। पय्ण्कों के मलए हदन में दो ्ार जीप-सफ़ारी की वय्वसथा है। सु्ह की सफ़ारी सूययोदय से 11 ्जे तक और दोपहर की 2:30 से सूया्णसत तक चलती है। उदयान के तीन द्वार हैं। सफ़ारी तुररया गे् से चलती है। ्ाकी के दोनों गे् घनी ्वनसपतत से तघरे हैं और ्वहाँ से जीप जाने के मलए रासता नहीं है। सफ़ारी के कड़े तनयम हैं, सफ़ारी के गाइड के तनधा्णररत पथ से ह्ना या जीप से ्ाहर तनकलना ्वजज्णत है। तनयमों का पालन करना ्वनय-जी्वों और मनुषय के मधय संतुलन ्नाए रखने के मलए अतन्वाय्ण है। पेंच पहुँचने के मलए ह्वाई, रेल और सड़क के माग्ण हैं। तनक्तम ह्वाई अडडा नागपुर है जो पेंच से 93 ककलोमी्र दूर है। इस ह्वाई अडडे से देश के सभी प्रमुख शहरों को जोड़ने ्वाली तनयममत उड़ानें हैं। रेलयाबत्रयों के मलए तनक्तम स्ेशन मस्वनी है जो पेंच से लगभग 30 ककलोमी्र दूर है। मस्वनी ्स स्ैणड से पेंच जाने के मलए ्स, ्ैकसी और जीप उपलबध हैं। पय्ण्कों के ्ठहरने के मलए आस-पास स् तरह की सुव्वधा ्वाले अनेक लॉज और पय्ण्न केंद् हैं।

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9 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over अभ्यास 3: प्रश्न 16–19 ‘पेंच रया्ट्दी् उद्या्न’ आलेख के आियार पर ्नीचे ढ़्ए गए प्रत््ेक शीर्वक (16–19) के अबंतग्वत सबंक्षिपत ्नोटि ललखें। 8 [पूणाांक 9] अभ्यास 4 ्में आप आलेख और अप्ने ्नोटस के आियार पर ‘पेंच रया्ट्दी् उद्या्न’ शीर्वक लेख कया सयारयाबंश ललखेंगे। 16 अ्वजसथतत और नाम का कारण • … • … [2] 17 उदयान खुलने और सफ़ारी का समय • … • … [2] 18 लोकवप्रयता के 3 कारण • … • … • … [3] 19 पहुँचने के साधन और सुव्वधाएँ • … • … [2]

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10 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 अभ्यास 4: प्रश्न 20 अभ्यास 3 के आलेख ‘पेंच राषट्ीय उदयान’ में भारत के प्रमसƦ राषट्ीय उदयान में पय्ण्न की सुव्वधा का ्वण्णन है। आप आलेख और अपने ्नाए नोटस के आधार पर उसका सारांश मलखें। आपका सारांश अधधकतम 100 शब्ों में होना चाहहए। आप यथासंभ्व अप्ने शब्ों में मलखें। आपको अबंतर्वसतु के ललए अधधकतम 4 अंक और सटिदीक एरबं सबंक्षिपत भयारया-शैलदी के ललए अधधकतम 6 अंक हदए जाएँगे।

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11 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [10] [पूणाांक 10]

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12 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 अभ्यास 5: प्रश्न 21 आप अपने व्वदयालय में कषिा-प्रतततनधध के चुना्व में उममीद्वार हैं। अपने सहपाह्ठयों को एक ई-मेल मलखें कक आप इस पद के मलए स्से योगय कयों हैं। 1 चुना्व का काय्णक्म 2 योगयता के प्रमाण 3 सहपाह्ठयों से ्वो् का आग्ह। आपकया ई-्मेल लगभग 120 शब्ों ्में हो्नया चयाढ़हए। आपको 3 अंक अबंतर्वसतु के ललए और 5 अंक सटिदीक भयारया एरबं शैलदी के मलए हदए जाएँगे।

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13 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [8] [पूणाांक 8]

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14 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 अभ्यास 6: प्रश्न 22 ‘प्या्वररण की सुरषिया कर्नया प्रत््ेक ्नयागररक कया ्यान्त्र है।’ आप कहाँ तक इस मत से सहमत हैं? अपने व्वचारों को समझाते हुए सकूल पबत्रका के मलए अपना लेख लगभग 200 शब्ों में मलखखए। आपका लेख व्वषय से सम्ंधधत जानकारी पर केजनद्त होना चाहहए। ऊपर ्दी गई ढ़टिपपखण्याँ आपके लेख्न के ललए ढ़्शया प्र्या्न कर सकती हैं। इ्नके ्मयाध््म से आप अप्ने वरचयारों को वरसतयार ्दीजिए। ललखखत प्रसतुनत पर अबंत्वरसतु के ललए 8 अबंक तक और सटिदीक भयारया के ललए भी 8 अबंक तक ढ़्ए ियाएँगे। … … … … … … … … … … … … … … … … … … पया्ण्वरण की सुरषिा सरकार का दातयत्व है। पया्ण्वरण की सुरषिा नागररक का दातयत्व है।

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15 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [16] [पूणाांक 16]

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16 0549/01/O/N/22 © UCLES 2022 Permission to reproduce items where third-party owned material protected by copyright is included has been sought and cleared where possible. Every reasonable effort has been made by the publisher (UCLES) to trace copyright holders, but if any items requiring clearance have unwittingly been included, the publisher will be pleased to make amends at the earliest possible opportunity. To avoid the issue of disclosure of answer-related information to candidates, all copyright acknowledgements are reproduced online in the Cambridge Assessment International Education Copyright Acknowledgements Booklet. This is produced for each series of examinations and is freely available to download at www.cambridgeinternational.org after the live examination series. Cambridge Assessment International Education is part of Cambridge Assessment. Cambridge Assessment is the brand name of the University of Cambridge Local Examinations Syndicate (UCLES), which is a department of the University of Cambridge. BLANK PAGE

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Cambridge’s own grade thresholds for 2022 Oct/Nov, Paper 1 · Variant 0. A higher threshold means an easier paper — the bar moves with how the cohort did.

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