Cambridge IGCSE Hindi as a Second Language 0549 — 2021 Oct/Nov Paper 1 · Variant 0
0549/10/O/N/21 · 60 marks · ≈68 min
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This document has 16 pages. Any blank pages are indicated. KI 206274/2 © UCLES 2021 [Turn over HINDI AS A SECOND LANGUAGE 0549/01 Paper 1 Reading and Writing October/November 2021 2 hours You must answer on the question paper. No additional materials are needed. INSTRUCTIONS ● Answer all questions. ● Use a black or dark blue pen. ● Write your name, centre number and candidate number in the boxes at the top of the page. ● Write your answer to each question in the space provided. ● Do not use an erasable pen or correction fluid. ● Do not write on any bar codes. ● Dictionaries are not allowed. INFORMATION ● The total mark for this paper is 60. ● The number of marks for each question or part question is shown in brackets [ ]. Cambridge IGCSE™ * 6 5 2 6 6 2 7 5 6 9 *
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2 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 अभ्यास 1: प्रश्न 1–6 ‘लोक-कथया कया महत्व’ आलेख को ध्या्नपू्व्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। लोक-कथा की विधा बहुत पुरानी और लोकवरिय है। लोक-कथाओं के नाना रूप हैं। सोते समय बच्चों की ज़िद पर उनके मनोरंजन के ललए सुनाई जाने िाली लोक-कथाएँ एक रिकार की हैं तो तीज-तययौहार पर सुनी-सुनाई जाने िाली दूसरे रिकार की। कुछ लोक-कथाएँ ‘एक था राजा और एक थी रानी’ की शैली में शुरू होती हैं तो कुछ जंगल में ‘एक शेर’ या ‘एक भालू’ था से। राजा-रानी की कहाननयाँ भी जनसाधारण के दु:ख-सुख के इद्द- गगद्द ही ्चलती हैं, उनमें भी विपदा के बादल गहराते हैं और विपदा ्चाहे ज़जतनी लमबी हो उसका अंत होता है। सुख के पल आते हैं और कहानी का अंत, ‘जैसे उनके ददन फिरे िैसे सबके फिरें’, से होता है। विपवति में डूबते-उबरते मन को ऐसी लोक-कथाएँ मनोरंजन और आशा के साथ एक नैनतक संदेश रिदान करती हैं। ऐसी ही एक कहानी उस अकेली ग्चड़िया की है ज़जसका दाना ्चककी के खूंटे में अटक गया और उसे पाने के ललए शांनत और धैय्द के साथ उसने लंबी कोलशश की। उसके सामने जीिन-मरण का रिशन था। उसने फकसी तरह से तो एक दाना जुटाया था, जब ्चककी में उसे दलने गई तो दाना ्चककी के खूंटे में अटका रह गया। अब कया खाए, कया पीए और कया लेकर परदेस जाए! िह बढ़ई के पास गई, और बढ़ई से खूंटा ्चीरने को कहा ताफक दाना बाहर ननकल जाए। बढ़ई ने मना कर ददया तो राजा के पास गई, ‘राजा, राजा बढ़ई को दंड दो!’ राजा ने उसकी बात अनसुनी कर दी तो रानी से राजा को छोिने की दरखिासत कर डाली। रानी ने मना फकया तो साँप के पास पँहु्ची – ‘रानी को डँसो’, साँप ने मना फकया तो लाठी से गुहार लगाई – ‘साँप को मारो।’ लाठी ने मना फकया तो आग से कहा, ‘लाठी को जला दो।’ आग के मना करने पर सागर से लमननत की, ‘आग को बुझा दो।’ सागर ने मना फकया तो हाथी से कहा, ‘सागर को सूँड में भर कर पी जाओ।’ हाथी ने मना फकया तो ्चींटी से कहा, ‘हाथी की सूँड में घुस कर उसे काट-काट कर बेदम कर दो।’ ्चींटी ने ग्चड़िया की गुिाररश सुन ली और हाथी को काटने दयौिी तो हाथी गगिगगिाया, ‘हमकू काटो-िाटो मनत कोई, हम सागर सोखब लेइ।’ हाथी सागर को सोखने ्चला तो सागर गगिगगिाया। इस तरह सागर आग को बुझाने पर, आग लाठी को जलाने पर, लाठी साँप को मारने पर, साँप रानी को डँसने पर, रानी राजा को छोिने पर, राजा बढ़ई को दंड़डत करने पर और अंत में बढ़ई खूंटा ्चीरने पर राजी हुआ। यह ग्चड़िया के सतत रियतन की जीत थी।
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3 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over 1 लोक-कथाओं के दो उददेशय कया हैं? • … • … [2] 2 लोक-कथाओं का अंत कैसे होता है? … [1] 3 ग्चड़िया की कया समसया थी? … [1] 4 ग्चड़िया ने रानी से कया माँगा? … [1] 5 ग्चड़िया की समसया का हल करने की पहल कब हुई? … [1] 6 कहानी से कयौन से दो संदेश लमलते हैं? • … • … [2] [पूणाांक 8]
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4 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 अभ्यास 2: प्रश्न 7–15 ‘सू््वकयांत त्रिपयाठी ‘न्नरयालया’’ के बयारे में छपे इस लेख को ध्या्न से पिें। प्रश्न 7 से 15 कया उत्तर दे्ने के ललए उ्नके ्नीचे ढ़दए गए अ्नुचछेदों (A से D) में से सही अ्नुचछेद चु्न कर उसके सयाम्ने के कोषठक में सही कया न्नशया्न लगयाएँ। अ्नुचछेदों को एक से अधिक बयार चु्नया िया सकतया है। A दहंदी के छायािादी युग के कवियों में सूय्दकांत त्रिपाठी ‘ननराला’ कई दृज़्टयों से बहुत महतिपूण्द हैं। उनकी लशक्ा बंगला भाषा में हुई थी और रिारंभ में िे बंगला में ही कविता ललखते थे। वििाह के बाद पतनी की रिेरणा से िे दहंदी में र्चना करने लगे। उनका वयज़कतति अनतशय विद्ोही और कांनतकारी ततिों से ननलम्दत हुआ था। जीिन की कदठन पररज़सथनतयों और पाररिाररक दु:खों के अनुभि से उनके वयज़कतति में विषाद और कभी हार न मानने के दृढ़ संकलप का अदभुत सज़ममश्रण था जो उनकी कविताओं में एक विशेष रिभाि पैदा करता है। वयज़कतति की ये विशेषताएँ उनकी कविताओं में छंद, भाषा-शैली और भाि संबंधी निीन रियोग के रूप में रिसतुत होने के साथ छायािाद युग की कविता को पररभावषत भी करती हैं। B ‘ननराला’ के सिालभमानी सिभाि के कारण लोगों के मन में यह धारणा जमी हुई थी फक िे अपने आगे फकसी को भी नहीं गगनते। बात फकसी हद तक ठीक भी थी। अपने मन के भाि िे फकसी के साथ बाँटने के बजाय उनहें कविता के रूप में अलभवयकत करते थे। कविता ललखने के पहले िे मन ही मन सो्चते रहते थे। अपने हृदय के उदगारों में तललीन होकर उनहें ्चुप्चाप छंद, ताल, लय और शबदों में बाँधने में लगे रहते थे। जब तक कविता पूरी तरह से आकार नहीं ले लेती, अपने ननकटतम लमरि या संबंगधयों से भी उसकी ्च्चा्द तक नहीं करते थे। इसललए ददन-रात उनके साथ रहने िालों को उनके मन में ्चलने िाली सृजन रिफकया का अनुमान तक नहीं होता था। लोग उनकी ऊपरी बातों से इतने आकवष्दत होते थे फक उनके भीतर नछपे कवि की छवि से ननतांत अनलभज्ञ रहते थे। ननराला के लमरि, डॉ रामविलास शमा्द ने उनके दोहरे वयज़कतति का वििरण देते हुए ललखा, ‘एक ददन अटठािन नंबर, नाररयल िाली गली, लखनऊ के मकान में कुछ घंटे नी्चे के कमरे में त्बताने के बाद, हाथ में एक कागि ललए िे ऊपर आए, तब मैं उनहीं के साथ रहता था, दो छंद पढ़ कर सुनाए और बोले, ‘तुलसीदास’ पूरा कर ददया है। ये उनकी रिलसदध कविता, ‘तुलसीदास’ के छंद थे। इसके पहले उनहोंने आभास तक नहीं ददया था फक उनका मन तुलसीदास के साथ ग्चरिकूट में घूम रहा है।’ C ननराला की बहुत सी कविताएँ आसानी से समझ में नहीं आतीं। िासति में िे कविता ललखने में बहुत पररश्रम करते थे, हर पंज़कत और हर शबद के संगीत और उनकी वयंजना का धयान रखते थे। केिल कविता ही नहीं, कभी-कभी परि ललखते हुए भी िे भाषा के गठन का इसी तरह धयान रखते थे। उनके घर में रिाय: अधललखे पोसटकाड्द देखने को लमलते थे। उनका यही रहसय था, थोिा सा ललखा, कोई शबद पसंद नहीं आया, तो फिर से शुरू फकया। अपनी बात कहने के ललए सही शबद की तलाश और उसे उपलबध होने की खुशी संसकृत के महाकवियों का समरण कराती है जो अपनी कविता में साथ्दक शबद ललखने की खुशी की तुलना पुरि-जनम के आनंद से करते थे। D कविताएँ पढ़ने और सुनाने में उनहें बिा आनंद आता था। सैंकिों कविताएँ, अपनी ही नहीं दूसरों की भी, उनहें कंठसथ थीं। सुनाते समय िे विहिल हो जाते थे, गला भर आता था और उनका विशाल आकार हिा में पतिे की तरह काँप उठता था। कविता सुनाते समय िे अपनी आँखों और सिर से उसकी ज़जतनी अचछी वयाखया कर देते थे, उतनी अचछी वयाखया कोई आलो्चक भी नहीं कर सकता था। शेकसवपयर के एक सॉनेट को लेकर िे अंग्ेिी के कई अधयापकों को परेशान कर ्चुके थे। इसी तरह काललदास के ‘मेघदूत’ के कुछ छंदों को लेकर उनहोंने संसकृत के कुछ आ्चाययों की परीक्ा ले डाली थी। ननराला का घर सादहतय रिेलमयों के ललए तीथ्दसथान था। रिलसदध सादहतयकारों से लेकर विदयागथ्दयों तक के ललए उनके दिार सदा खुले रहते थे। हालाँफक कविता को लेकर ननराला और रिलसदध कवि सुलमरिानंदन पंत के बी्च मतभेद थे, पर जब भी पंत लखनऊ आते थे, उनके यहाँ अिशय आते थे। दोनों के सरस िाता्दलाप को सुनकर यह अनुमान तक नहीं फकया जा सकता था फक िे एक-दूसरे के आलो्चक थे।
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5 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over ्नीचे ढ़दए गए ्वकतव्ों (7–15) को पढ़िए तथया कोषठक में सही कया न्नशया्न लगया कर बतयाइए कक कौ्न सया अ्नुचछेद (A–D) ककस ्वकतव् से समबंधित है। उदयाहरण: ‘ननराला’ दहंदी के सुरिलसदध कवि थे। A B C D 7 ‘ननराला’ के निदीक रहने िाले भी उनके मन में ्चलने िाली र्चना-रिफकया से अनलभज्ञ रहते थे। A B C D [1] 8 सादहज़तयक मतभेद को िे अपनी लमरिता के बी्च नहीं आने देते थे। A B C D [1] 9 ननराला की कविताएँ कदठन हैं। A B C D [1] 10 ‘ननराला’ की समरण शज़कत बहुत अचछी थी। A B C D [1] 11 ‘ननराला’ अपनी र्चनाओं के सबसे बिे आलो्चक थे। A B C D [1] 12 ‘ननराला’ का वयज़कतति जदटल था। A B C D [1] 13 ‘ननराला’ की कविताओं से छायािादी कविता की विशेषता को समझा जा सकता है। A B C D [1]
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6 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 14 दहंदी के साथ संसकृत और अंग्ेिी सादहतय की भी उनहें गहरी समझ थी। A B C D [1] 15 जीिन के कदठन संघष्द ने उनके भीतर सादहतय में निीन रियोग करने का साहस भरा था। A B C D [1] [पूणाांक 9]
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7 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over BLANK PAGE
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8 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 अभ्यास 3: प्रश्न 16–19 ‘उड़या्नही्न पक्ी – पैंज््व्न’ के बयारे में न्नम्नललखखत आलेख को ध्या्नपू्व्वक पढ़िए। सालभर बि्द से आचछाददत पृथिी के दक्क्णी ध्ुि में बहुत कम रिाणी जीवित रह पाते हैं, फकंतु दो पैरों पर डगमगाकर ्चलने िाले पैंज़्िन के ललए यह अनुकूल आिास है। पैंज़्िन उिनशील पूि्दजों के िंशज हैं। सभी पक्क्यों के पंख होते हैं, ज़जनका उपयोग िे उिने के ललए करते हैं। पर पैंज़्िन अपने पंखों से उिने की क्मता खोकर उनका रियोग बदल कर तैराक बन गए। उनकी हडड़डयाँ भारी हो गईं ज़जससे उनहें पानी में डुबकी लगाने में सहायता लमली और ्चपपू जैसे हाथ उनहें तैराकी में मादहर बनाते हैं। िे 25 मील रिनत घंटे की रफ़तार से 1650 िुट से भी अगधक गहरे पानी में तैरते हैं। धरती पर िे अपने डगमगाते कदमों से ्चलते हैं, पर उनका 80 रिनतशत समय पानी में वयतीत होता है। पैंज़्िन की 17-20 रिजानतयाँ हैं ज़जनमें से 47 इं्च लंबा और सबसे बिा, ऐमपरर पैंज़्िन दक्क्णी ध्ुि में रहता है। यह केिल एक लमथक है फक सभी पैंज़्िन ठंडे रिदेशों में ही रहते हैं। गहरे नीले रंग की पीठ और सफ़ेद िक् िाला, 13 इं्च लंबा, सबसे छोटा कोरोरा पैंज़्िन नयूिीलैंड के तटीय रिदेशों, तसमाननया, दक्क्ण ऑसट्ेललया, और दक्क्ण अफ्ीका में पाया जाता है। गैलापगोस पैंज़्िन की एकमारि ऐसी रिजानत है जो भूमधय रेखा के उतिर में वि्चरण करती है। पैंज़्िन एक सामाज़जक रिाणी है जो एक बसती या कॉलोनी बना कर समूह में रहता है। पैंज़्िन का मुखय भोजन मछली और झींगा हैं ज़जनका लशकार िह पानी में गोता लगाकर करता है। िह पानी के भीतर 20 लमनट तक रह सकता है और समुद् का ख़ारा पानी पीता है। मुँह के भीतर दाँत न होने के कारण लशकार पकिने और खाने के ललए अपनी ्चों्च का इसतेमाल करता है। लगभग पाँ्च साल की उम्र में मादा पैंज़्िन रिजनन के ललए तैयार हो जाती है। अगधकतर रिजानतयाँ िसंत और ग्ी्म ऋतु में रिजनन करती हैं। आमतयौर पर नर पैंज़्िन अपनी जोिी ्चुनने के बाद घोंसले के ललए एक अचछी जगह खोज लेता है। ऐमपरर पैंज़्िन के बारे में यह कहा जाता है फक जब िह एक बार अपने ललए मादा पैंज़्िन ्चुन लेता है तो आजीिन उसी के साथ रहता है। कदाग्चत इसी कारण से सथायी रिेम को ‘पैंज़्िन लि’ कहते हैं! मादा ऐमपरर पैंज़्िन केिल एक अंडा देती है, उसके अलािा अनय सभी रिजानतयाँ एक समय में दो अंडे देती हैं। मादा ऐमपरर पैंज़्िन बालू के टीले या ्चटटानों के बी्च अंडा देकर कई सपताह के ललए भोजन की तलाश में ननकल जाती है और नर त्बना खाए-पीए घोंसले में अंडे को अपने पैरों के बी्च रख कर सेता है। अंडे को 40 ददनों तक सेने के बाद ्चूिे बाहर ननकलने के ललए तैयार होते हैं। िे अपनी ्चों्च की मदद से अंडा तोिकर बाहर आते हैं। मादा पैंज़्िन तब िावपस लयौट कर उनकी देखभाल शुरू करती है। नर और मादा दोनों लमलकर ्चूिे को अपनी ्चों्च से खाना खखलाते हैं। जनम के समय पैंज़्िन के ्चूिे का ििन लगभग 35 ग्ाम और शरीर पर कोमल रोएँ होते हैं। आठ सपताह के भीतर उनका ििन तीन गुणा हो जाता है। जब तक ्चूिों के शरीर पर जल-अिरोधक पंख विकलसत नहीं होते, नर और मादा उनकी देखभाल करते हैं। पंख आ जाने पर िे आतमननभ्दर होकर पानी की ददशा में ्चले जाते हैं। िे गले के सिर से परसपर संिाद करते हैं। ्चूिों की आिाि से मादा उनहें पह्चान लेती है। पैंज़्िन के विषय में कहा जाता है फक धरती पर उनका कोई शरिु नहीं होने के कारण उनके अज़सतति को कोई ख़तरा नहीं। लेफकन जलिायु-पररित्दन के कारण अब उन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वपछले पाँ्च दशकों से िैज्ञाननकों का एक दल हिाई और उपग्ह तसिीरों से पैंज़्िन की घटती हुई संखया का अधययन कर रहा है। जलिायु-पररित्दन के दु्रिभाि से दक्क्णी ध्ुि की बि्द वपघलने से ऐसे हजारों ्चूिों की एक पूरी बसती, जो जल-अिरोधक पंख न होने के कारण पानी में तैरने में असमथ्द थी, डूब कर न्ट हो गई। 1980 में विशि की सबसे अगधक संखया िाले ऐमपरर पैंज़्िन की संखया बहुत तेिी से घटी है और अभी भी घटती जा रही है। यदद जलिायु पररित्दन की रोकथाम नहीं की गई और तापमान इसी तरह से बढ़ता गया तो इस शताबदी के अंत तक दक्क्णी ध्ुि में पैंज़्िन की 70 रिनतशत आबादी समापत हो जाने की आशंका है। इसललए जीि िैज्ञाननक इस उिानहीन पक्ी की गणना संकटापनन रिजानत के अंतग्दत करिाने की ्चे्टा में हैं।
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9 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over अभ्यास 3: प्रश्न 16–19 ‘उड़या्नही्न पक्ी – पैंज््व्न’ आलेख के आियार पर ्नीचे ढ़दए गए प्रत्ेक शीर्वक (16-19) के अंतग्वत संक्क्पत ्नोट ललखें। 8 [पूणाांक 9] अभ्यास 4 में आप आलेख और अप्ने ्नोटस के आियार पर ‘उड़या्नही्न पक्ी – पैंज््व्न’ शीर्वक लेख कया सयारयांश ललखेंगे। 16 पैंज़्िन की विशेषताएँ • … • … [2] 17 रिजानतयाँ और आिास • … • … [2] 18 भोजन और रिजनन • … • … [2] 19 अज़सतति पर ख़तरा और संरक्ण के उपाय • … • … • … [3]
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10 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 अभ्यास 4: प्रश्न 20 अभ्यास 3 के आलेख ‘उिानहीन पक्ी – पैंज़्िन’ में पैंज़्िन के जीिन-्चक, अननज़श्चत भवि्य और संरक्ण के उपाय का िण्दन है। अभ्यास 3 के आलेख और अपने बनाए नोटस के आधार पर उसका सारांश ललखें। आपका सारांश 100 शबदों से अगधक नहीं होना ्चादहए। आप यथासंभि अप्ने शबदों में ललखें। आपको अंत्व्वसतु के ललए अगधकतम 4 अंक और सटीक और संक्क्पत भयारया-शैली के ललए अगधकतम 6 अंक ददए जाएंगे।
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11 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [10] [पूणाांक 10]
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12 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 अभ्यास 5: प्रश्न 21 आपने एक कहानी पढ़ी जो आपको बहुत पसंद आई। कहानी के लेखक को एक ई-मेल ललखें। आपके ई-मेल में ननमनललखखत बातें सज़ममललत होनी ्चादहए: • संक्ेप में कहानी की विषय िसतु • कहानी का सबसे रो्चक पहलू • आप उसमें कया बदलना ्चाहेंगे? आपकया ई-मेल लगभग 120 शबदों में हो्नया चयाढ़हए। आपको पता ललखने की आिशयकता ्नहीं है। आपको 3 अंक अंति्दसतु के ललए और 5 अंक सटीक भाषा और शैली के ललए ददए जाएंगे।
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13 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [8] [पूणाांक 8]
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14 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 अभ्यास 6: प्रश्न 22 अलभभया्वकों को अप्नी संतया्न पर उ्नकया भव्वष् चु्न्ने के ललए अप्नी अिूरी इचछयाएँ ्नहीं थोप्नी चयाढ़हए। आप कहाँ तक इस मत से सहमत हैं? अपने वि्चारों को समझाते हुए सकूल पत्रिका के ललए अपना लेख लगभग 200 शबदों में ललज़खए। आपका लेख विषय की जानकारी पर केज़नद्त होना ्चादहए। ऊपर दी गई ढ़टपपखण्याँ आपके लेख्न के ललए ढ़दशया प्रदया्न कर सकती हैं। इ्नके मयाध्म से आप अप्ने व्वचयारों को व्वसतयार दीजिए। ललखखत प्रसतुनत पर अंत्व्वसतु के ललए 8 अंक तक और सटीक भयारया के ललए भी 8 अंक तक ढ़दए ियाएंगे। … … … … … … … … … … … … … … … … … … अलभभािक संतान को अपने अनुभि का लाभ देना ्चाहते हैं। संतान को अपने अनुभि से सीखने का अगधकार है।
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15 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [16] [पूणाांक 16]
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16 0549/01/O/N/21 © UCLES 2021 Permission to reproduce items where third-party owned material protected by copyright is included has been sought and cleared where possible. Every reasonable effort has been made by the publisher (UCLES) to trace copyright holders, but if any items requiring clearance have unwittingly been included, the publisher will be pleased to make amends at the earliest possible opportunity. To avoid the issue of disclosure of answer-related information to candidates, all copyright acknowledgements are reproduced online in the Cambridge Assessment International Education Copyright Acknowledgements Booklet. This is produced for each series of examinations and is freely available to download at www.cambridgeinternational.org after the live examination series. Cambridge Assessment International Education is part of the Cambridge Assessment Group. Cambridge Assessment is the brand name of the University of Cambridge Local Examinations Syndicate (UCLES), which itself is a department of the University of Cambridge. BLANK PAGE
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Cambridge’s own grade thresholds for 2021 Oct/Nov, Paper 1 · Variant 0. A higher threshold means an easier paper — the bar moves with how the cohort did.