Cambridge IGCSE Hindi as a Second Language 0549 — 2019 Feb/March Paper 1 · Variant 0
0549/10/F/M/19
The question paper and its mark scheme, free to read here and free to download. This is Cambridge’s own paper, exactly as it was sat.
Question paper16 pages
















Mark scheme
No mark scheme is in the library for this paper.
Paper as text
Question paper, page 1
This document consists of 14 printed pages and 2 blank pages. KI 164853/3 © UCLES 2019 [Turn over * 9 1 8 0 3 8 4 2 8 4 * HINDI AS A SECOND LANGUAGE 0549/01 Paper 1 Reading and Writing February/March 2019 2 hours Candidates answer on the Question Paper. No Additional Materials are required. READ THESE INSTRUCTIONS FIRST Write your centre number, candidate number and name on all the work you hand in. Write in dark blue or black pen. Do not use staples, paper clips, glue or correction fluid. DO NOT WRITE IN ANY BARCODES. Answer all questions. The number of marks is given in brackets [ ] at the end of each question or part question. Cambridge Assessment International Education Cambridge International General Certificate of Secondary Education
Question paper, page 2
2 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 अभ्यास 1 ‘सीलमपुर बस्ी में शिक्या कया प्रभयाव’ आलेख को ध्यानपूव्वक पढ़िए और पूछे गए प्रशनों के उत् ्र दीजिए। उत् तर भारत में सीलमपुर गाँव की बसती, आये दिन होने वाली चोरी, डकैती और हत्या जैसी वारिातों के कारण, कुखयात थी। संधया के समय अन्ेरा होते ही बसती के लोग, ख़ास करके लड़ककयाँ घर से बाहर ननकलने से डरती थीं। कुछ वर्ष पहले जब दिलली की नगरपाललका ने राज्ानी की सफ़ाई अलभयान के तहत शहर से झुग्गयों को हटाने की योजना बनाई तो उन झुग्गयों में रहने वालों के ललए सीलमपुर में रहने के ललए मकान बनवा कर उनहें वहाँ सथानांतररत कर दिया। नये आए लोगों में एन जी ओ में काम करने वाले प्रबो्कुमार भी थे। उनका ववशवास था कक इन सारे अपरा्ों का मूल कारण बसती में फैली अलशक्ा और बेरोज़गारी है। रोज़गार बढ़ाने और अपरा् कम करने के ललए लशक्ा आवशयक है। उनहोंने बसती के बचचों को पढ़ाना शुरू ककया। उनकी वरषों की प्रनतबƨता और लगन के फलसवरूप आज सीलमपुर की पहचान ही बिल गई है। इस बसती के अध्कतर लोग ररकशा चालक, सफ़ाईकममी या सडकों पर फेरी लगाने वाले हैं और पीढ़ी िर पीढ़ी से यही करते आ रहे हैं। लेककन अब उनके बचचे बड़े होकर अपने पुशतैनी काम की जगह उचच लशक्ा प्रापत करके अचछछी नौकरी या वयवसाय कर रहे हैं। जो लड़ककयाँ पहले संधया समय घर से बाहर ननकलने से डरती थीं वे अब ननभमीक रूप से अपनी लशक्ा पूरी करके सकूलों, असपतालों या ऑकफसों में काम कर रही हैं। उनके आत्मववशवास के पीछे एक लमबा संघर्ष और कदिन पररश्रम है। शगुफता को आज भी दिलली की झु्गी में बबताया अपना बचपन याि है। आसपास की झुग्गयों में रहने वाले बचचों के साथ ्ूल और गंिगी की अं्ेरी िुननया में समय बबताते समय उसने कभी कलपना भी नहीं की थी कक इसके बाहर कोई और िुननया भी हो सकती है। शगुफता के वपता सड़कों पर फेरी लगाने का काम और माँ घर-घर जाकर साफ़–सफ़ाई करने का काम करती हैं। एन जी ओ की सहायता से शगुफता ने बी ए पास कर ललया है। शुरू-शुरू में पढ़ाई करने के ललए उसको कदिन संघर्ष करना पड़ा था। बड़ा भाई उसके आगे पढ़ने के ववरुƨ था और घर में बड़े भाई की ही चलती थी। ककसी तरह से भाई को राजी करके उसने कॉलेज में िाख़ख़ला तो ले ललया पर फ़ीस भरने की समसया आई। शगुफता ने बचचों को टयूशन पढ़ाकर फ़ीस के पैसे जमा कर अपनी पढ़ाई पूरी की। वह यह जानती है कक लशक्ा एक ऐसा पासपोट्ष है गजसके दवारा वह सीलमपुर की बसती से ननकलकर एक सवतंत्र नागररक का जीवन बबता सकती है। वह भववषय के ललए आशावान है!
Question paper, page 3
3 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over 1 सीलमपुर ककस कारण से बिनाम था? … [1] 2 लोगों को सीलमपुर के मकानों मे रहने के ललए कयों भेजा गया? … [1] 3 बसती में रहने वाले अध्कतर लोगों का कया पेशा था? कोई दो ललख़िए। • … • … [2] 4 लड़ककयों की सोच में लशक्ा का कया प्रभाव पड़ा? … [1] 5 बचपन में शगुफता अपने भववषय के बारे में कया सोचती थी? … [1] 6 शगुफता को अपने उƧेशय पूनत्ष के ललए ककन 2 रुकावटों का सामना करना पड़ा? • … • … [2] [Total: 8]
Question paper, page 4
4 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 अभ्यास 2 ‘सवयास्थ् और कोलेस्ेरॉल’ के बयारे में छपे इस लेख को ध्यान से पिें। प्रशन 7 से 15 कया उत् ्र देने के शलए उनके नीचे ढ़दए गए अनुचछेदों (A से D) में से सही अनुचछेद चुन कर उसके सयामने के कोष्ठक में सही कया ननियान लगयाएँ। अनुचछेदों को एक से अधिक बयार चुनया िया सक्या है। A कोलेसटेरॉल एक मोमी पिाथ्ष है जो हमारे शरीर के ललए अनत आवशयक है। यह हमारे शरीर में गजगर के अंिर बनता है और शरीर की हर कोलशका में पाया जाता है। इसके अलावा यह कुछ िादय पिाथषों में भी पाया जाता है। सवसथ रहने के ललए आवशयक ववटालमन डी, कुछ हॉरमोन एवं भोजन पचाने में सहायक वपत् त को सकरिय रिने के ललए शरीर में कोलेसटेरॉल का होना ज़रूरी है। हमारे शरीर में बचपन से ही कोलेसटेरॉल बनने लगता है। ककंतु इसकी मात्रा ज़रूरत से अध्क बढ़ जाने पर सवास्थय पर ववपरीत प्रभाव पड़ सकने की संभावना होती है। B कोलेसटेरॉल िो प्रकार के होते हैं – ऐल डी ऐल जो प्राय: ‘िराब कोलेसटेरॉल’ के नाम से जाना जाता है और ऐच डी ऐल जो अपने सुरक्ात्मक प्रभाव के कारण प्राय: ‘अचछे कोलेसटेरॉल’ के नाम से जाना जाता है। शरीर में ऐल डी ऐल कोलेसटेरॉल की अध्कता सवास्थय के ललए हाननप्रि है। यह रकत की ्मननयों की िीवार से धचपक कर उनहें सकरा कर सकता है गजसकी वजह से रकत संचार में रुकावट पैिा होती है। ऐच डी ऐल अथा्षत अचछा कोलेसटेरॉल शरीर की ्मननयों से धचपक कर उनको सखत और सकरा करने के बजाय रकत संचार के दवारा गजगर में वापस एकत्र हो जाता है जहाँ से वह चूर होकर अथवा मलमूत्र के दवारा शरीर से बाहर ननकल जाता है। सवसथ रहने के ललए इन िोनों कोलेसटेरॉलों के अनुपात में संतुलन रिना आवशयक है। िोनों कोलेसटेरॉलों के सतर की जानकारी रिकर हृिय रोग के ितरे को समझने में सहायता लमल सकती है। रकत में ऐल डी ऐल और ऐच डी ऐल कोलेसटेरॉल की मात्रा की जानकारी रकतजाँच दवारा की जा सकती है। C शरीर में कोलेसटेरॉल की मात्रा बढ़ने के कई कारण होते हैं। उनमें से एक मनुषय की जीन अथा्षत वंश का प्रभाव है जो अपने माता वपता से ववरासत में लमलता है। कुछ लोग इसी कारण सवास्थय के ननयमों का पालन करने के बावज़ूि उचच कोलेसटेरॉल के लशकार होते हैं। इसके अनतररकत जीवन शैली और आहार, शारीररक वज़न, ललंग (सत्री या पुरुर), उम्र, जातीयता और पूव्ष रोगों के इनतहास का भी योगिान होता है। इन सभी को धयान में रिकर धचककत्सक रकत में कोलेसटेरॉल की बढ़ी हुई मात्रा से होने वाले ितरे को कम करने के ललए सटैदटन नामक िवा लेने का परामश्ष िेते हैं। D ऐसा िेिा गया है कक भूमधयसागरीय िेशों में रहने वाले लोग उत् तरी यूरोपीय और िक्क्ण पूव्ष एलशया के िेशों की तुलना में हृिय रोग से कम पीड़ड़त होते हैं। उसके पीछे उनकी परमपरागत जीवन शैली मानी जाती है। भूमधयसागरीय िेशों के ननवालसयों के भोजन में मुखय रूप से ताज़ी सग्जयाँ, फल, मोटे अनाज की रोटी, िालें, मटर, फललयाँ, मेवे, बीज मछली आदि रहते हैं। वे मकिन अथवा माज्षरीन की जगह जैतून अथा्षत ऑललव के तेल से िाना पकाते हैं। जलवायु की उषणता और मछली िाने के कारण उनका शरीर ववटालमन डी से पुषट रहता है। धचककत्सकों के अनुसार भूमधयसागरीय आहार शैली को अपना कर हृियरोग, म्ुमेह और रकतचाप की बीमाररयों से बचाव संभव हो सकता है। इसके अलावा सकरिय जीवन शैली और ननयलमत वयायाम से कोलेसटेरॉल के बढ़ने पर रोकथाम की जा सकती है।
Question paper, page 5
5 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over नीचे ढ़दए गए वक्व्ों (7–15) को पढ़िए ्थया कोष्ठक में सही ☑ कया ननियान लगया कर ब्याइए कक कौन सया अनुचछेद (A–D) ककस वक्व् से समबबंधि् है। उदयाहरण: कौन सया अनुचछेद कोलेस्ेरॉल एक धचकनया पदयाथ्व है। A B C D 7 बुरा कोलेसटेरॉल ्मननयों में िून के प्रवाह को कम कर िेता है। A B C D [1] 8 शरीर में कोलेसटेरॉल का सतर वंश से नन्ा्षररत होता है। A B C D [1] 9 ऐच डी ऐल कोलेसटेरॉल ्मननयों से धचपकने की जगह शरीर से बाहर ननकल जाता है। A B C D [1] 10 कसरत करते रहने से कोलेसटेरॉल को बढ़ने से रोका जा सकता है। A B C D [1] 11 अचछे और बुरे कोलेसटेरॉल के अनुपात में संतुलन रिना ज़रूरी है। A B C D [1] 12 ताज़े फल और हरी सग्ज़याँ सवास्थयप्रि-आहार का दहससा हैं। A B C D [1] 13 कोलेसटेरॉल को िवा से ननयंबत्रत ककया जा सकता है। A B C D [1]
Question paper, page 6
6 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 14 उत् तरी यूरोप में रहने वाले लोग भूमधयसागरी िेशों के ननवालसयों की तुलना में दिल की बीमारी के अध्क लशकार होते हैं। A B C D [1] 15 कोलेसटेरॉल गजगर में बनता है। A B C D [1] [Total: 9]
Question paper, page 7
7 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over BLANK PAGE
Question paper, page 8
8 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 अभ्यास 3 ‘ऑकक्वड’ के बयारे में ननमनशलखख् आलेख को ध्यानपूव्वक पढ़िए। ऑकक्षड का फूल अपनी अप्रनतम सुंिरता और रंगों की वववव्ता के ललए प्रलसƨ है। ऐसा माना जाता है कक वनसपनत-पररवार में ऑकक्षड की सबसे ज़यािा प्रजानतयाँ पाई जाती हैं। ववशव में लगभग 25 हज़ार ककसम के ऑकक्षडों की गणना की गई है और अभी भी वनसपनत-शासत्री नये-नये ऑकक्षड की िोज करते रहते हैं। ऑकक्षड के ललए कहा जाता है कक उसको उगाना, कदिन है कयोंकक उसके ललए सूरज की छनी हुई रोशनी और नम आबोहवा ज़रूरी है। ऑकक्षड के पौ्े प्राय: घर के अंिर लगाए जाते हैं और उनके फूल गुलिसतों में सजावट के ललए उपयोग होते हैं। यह सच है कक अलग-अलग िेशों में ऑकक्षड के बारे में लभनन-लभनन ्ारणाएँ हैं। ककंतु उनमें एक समानता यह है कक सभी ऑकक्षड के फूल, ववशेरकर सफ़ेि ऑकक्षड को प्रेम, सौंिय्ष, उव्षरता, सुरुधच, आकर्षण और मासूलमयत का प्रतीक मानते हैं। महारानी ववकटोररया के राजयकाल में इं्लैणड में ऑकक्षड को ववलालसता का प्रतीक मानते थे। संभवत: इसका कारण फूल की िुल्षभता रहा होगा। जापान के शाही पररवार में ऑकक्षड को ऐशवय्ष का प्रतीक मानते थे। प्राचीन काल में चीन के धचककत्सक इससे सिदी, िाँसी और शवास समबन्ी रोगों के इलाज की औरध् बनाते थे। ग्ीस में प्रचललत कहावत के अनुसार ऑकक्षड के फूल िाने से पुत्र जनम की आकांक्ा रिने वाली सत्री की मनोकामना पूरी हो सकती है। भारतवर्ष में ऑकक्षड से हृिय रोग और क्य रोग के उपचार की आयुववेदिक औरध् बनाते हैं। भारतवर्ष में ऑकक्षड की सबसे अध्क प्रजानतयाँ पाई जाने का कारण वहाँ की जलवायु की वववव्ता है। एक ओर उत् तर में दहमालय के लशिर पर बफ्ष की चािर बबछछी रहती है और िूसरी ओर िक्क्ण में उषणकदटबन् की जलवायु लमलती है। िक्क्ण और पूरब दिशा के पहाड़ी जंगलों में ऑकक्षड की अनधगननत प्रजानतयाँ पाई जाती हैं। उन सभी प्रजानतयों का वगमीकरण करके भववषय में उनके संरक्ण के ललए भारत तथा यूके के कयू गाडवेन के वनसपनतशासत्री उनकी सूची बना रहे हैं। प्राकृनतक आवास के अनुसार ऑकक्षड के तीन वग्ष हैं - टेरेगसरिअल या ्रती पर उगने वाले ऑकक्षड, गजनकी जड़ें लम͠ी के नीचे रहती हैं, ललथोकफदटक, या च͠ानों पर उगने वाले जो बाहरी वातावरण से पोरण लेते हैं और एपीकफदटक या वायुभक्ी ऑकक्षड जो वृक् के तनों में उगते हैं और वायुमणडल से पोवरत होते हैं। भारत में अध्कांश ऑकक्षड इसी श्रेणी के होते हैं। जंगल-कटाई से उनका अगसतत्व भी ितरे में है। ऑकक्षड के फूलों की ववशेरता उनके अलग-अलग रंगों में बताई जाती है। उनमें सबसे िुल्षभ नीला ऑकक्षड है गजसका समबन् आधयागत्मकता और धयान से जोड़ा जाता है। यह केवल आसाम और दहमालय की पहाड़ड़यों में 900-1500 फीट की ऊँचाई पर उगता है। यही कारण है कक इसका िूसरा नाम दहमालय का ऑकक्षड है। दहंिुओं के ववशवास के अनुसार यह पववत्र फूल िेवताओं को चढ़ाने यो्य है। गुलाबी रंग का ऑकक्षड सत्री की शालीनता और मासूलमयत, बैंगनी रंग राजलसक सममान, प्रशगसत एवं गररमा; लाल रंग अलभलारा, उमंग, ्ीरता और शगकत; पीला रंग आनंि और नवीन शुरुआत के साथ मैत्री का दयोतक माने जाते हैं। नारंगी रंग गव्ष, साहस और उत्साह तथा हरा ऑकक्षड प्रकृनत, सुंिर सवास्थय और िीघ्ष जीवन का प्रतीक है।
Question paper, page 9
9 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over ‘ऑकक्वड’ आलेख के आियार पर नीचे ढ़दए गए प्रत््ेक िीर्वक (16–19) के अबं्ग्व् सबंक्क्प् नो् शलखें। 8 [Total: 9] अभ्यास 4 में आप आलेख और अपने नोटस के आियार पर ‘ऑकक्वड’ िीर्वक लेख कया सयारयाबंि शलखेंगे। 16 ऑकक्षड के फूल की लोकवप्रयता के कारण • … • … [2] 17 ऑकक्षड के पौ्े के ललए उपयुकत िशा • … • … [2] 18 औरध् के रूप में ऑकक्षड के फूल के कोई 2 उपयोग • … • … [2] 19 नीले, नारंगी और बैंगनी रंग के ऑकक्षड की ववशेरताएँ • … • … • … [3]
Question paper, page 10
10 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 अभ्यास 4 20 ‘ऑकक्षड’ शीर्षक आलेि और अभयास 3 में बनाए अपने नोटस के आ्ार पर उसके ववलभनन उपयोग, अगसतत्व पर ितरे और संरक्ण के सारांश अपने श्िों में ललिें। आपका सारांश अध्कतम 100 िबदों में होना चादहए। आप यथासंभव अपने िबदों में ललिें। आपको अंतव्षसतु के ललए अध्कतम 4 अंक और स्ीक एवबं सबंक्क्प् भयारया-िैली के शलए अध्कतम 6 अंक दिये जाएंगे। ऑकक्वड की उप्ोधग्या, ख्रे और सबंरक्ण के उपया्
Question paper, page 11
11 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [10] [Total: 10]
Question paper, page 12
12 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 अभ्यास 5 21 आप सोशल मीड़डया पर अपने एक लमत्र से लमले हैं। उनसे आपकी मुलाकात सालों बाि हुई है। आप उनहें एक ई-मेल ललिें। आपके ई-मेल में ननमनललख़ित बातें सगममललत होनी चादहए। • लमत्र से जुड़ी हुई कोई याि • सोशल मीड़डया पर उनसे लमलकर आपको कैसा लगा • उनसे वयगकतगत रूप से लमलने के ललए ललिें। आपकया ई-मेल लगभग 120 िबदों में होनया चयाढ़हए। आपको ई-मेल का पता ललिने की आवशयकता नहीबं है। आपको 3 अंक अंतव्षसतु के ललए और 5 अंक स्ीक भारा और शैली के ललए दिए जाएंगे।
Question paper, page 13
13 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [8] [Total: 8]
Question paper, page 14
14 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 अभ्यास 6 22 क्या पैसों से िीवन की खुशि्याँ खरीदी िया सक्ी हैं? आप कहाँ तक इस मत से सहमत हैं। अपने ववचारों को समझाते हुए सकूल पबत्रका के ललए अपना लेि लगभग 200 श्िों में ललख़िए। आपका लेि ववरय से संबंध्त जानकारी पर केगनरित होना चादहए। ऊपर दी गई ढ़्पपखण्याँ आपके लेखन के शलए ढ़दिया प्रदयान कर सक्ी हैं। इनके मयाध्म से आप अपने ववचयारों को ववस्यार दीजिए। शलखख् प्रस्ुन् पर अबं्व्वस्ु के शलए 8 अबंक ्क और स्ीक भयारया के शलए भी 8 अबंक ्क ढ़दए ियाएबंगे। … … … … … … … … … … … … … … … … … … पैसे से मन की सभी इचछाएं पूरी की जा सकती हैं। पैसे से सब कुछ नहीं िरीिा जा सकता है।
Question paper, page 15
15 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 [Turn over … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [16] [Total: 16]
Question paper, page 16
16 0549/01/F/M/19 © UCLES 2019 Permission to reproduce items where third-party owned material protected by copyright is included has been sought and cleared where possible. Every reasonable effort has been made by the publisher (UCLES) to trace copyright holders, but if any items requiring clearance have unwittingly been included, the publisher will be pleased to make amends at the earliest possible opportunity. To avoid the issue of disclosure of answer-related information to candidates, all copyright acknowledgements are reproduced online in the Cambridge Assessment International Education Copyright Acknowledgements Booklet. This is produced for each series of examinations and is freely available to download at www.cambridgeinternational.org after the live examination series. Cambridge Assessment International Education is part of the Cambridge Assessment Group. Cambridge Assessment is the brand name of the University of Cambridge Local Examinations Syndicate (UCLES), which itself is a department of the University of Cambridge. BLANK PAGE