Cambridge IGCSE Hindi as a Second Language 0549 — 2018 Oct/Nov Paper 1 · Variant 0

0549/10/O/N/18

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Question paper16 pages

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Question paper, page 1

This document consists of 13 printed pages and 3 blank pages. KI 148044/3 © UCLES 2018 [Turn over * 6 4 1 5 2 8 9 1 9 4 * HINDI AS A SECOND LANGUAGE 0549/01 Paper 1 Reading and Writing October/November 2018 2 hours Candidates answer on the Question Paper. No Additional Materials are required. READ THESE INSTRUCTIONS FIRST Write your Centre number, candidate number and name on all the work you hand in. Write in dark blue or black pen. Do not use staples, paper clips, glue or correction fluid. DO NOT WRITE IN ANY BARCODES. Answer all questions. The number of marks is given in brackets [ ] at the end of each question or part question. The syllabus is approved for use in England, Wales and Northern Ireland as a Cambridge International Level 1/Level 2 Certificate. Cambridge International Examinations Cambridge International General Certificate of Secondary Education

Question paper, page 2

2 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 खंड 1 अभ्यास 1 प्रư 1–5 निमिलिखखत िेख ‘प्यायावरण सुरक्या की सेियािी मल्िकया प्रसयाद’ पढ़िए और ढ़दए गए प्रưɉ के उत्तर दीलिए। मल्लिका प्रसाद परायावरण सुरक्ा के तहत आरोलित अंटाल्कटयाक अभिरान के भलिए चुनी गईं प्रथम िारतीर महहलिा हैं। इसके पहलिे 23 वरया की उम्र में उनहें ‘टीच फॉर इंडिरा’ की छात्रवृत्ति भमलिी थी। उस दौरान छोटे बचचों को परायावरण की सुरक्ा के ननरम भसखाते समर वे अ्कसर उन ननरमों को िीवन में लिागू करने के उपार के त्वरर में सोचा करती थीं। छात्रवृत्ति पूरी होते ही मल्लिका ‘परायावरण बचाओ’ का संदेश देने के भलिए अकेलिी िारत-भ्रमण के भलिए ननकलि पड़ीं। अपने संदेश को िनमानस तक पहुंचाने के भलिए उनहोंने दैननक िीवन की कुछ ऐसी आदतों पर धरान देने का ननƱर ककरा लिनको आसानी से बदलिा िा सके और िो परायावरण के अनुकूलि हों। मल्लिका ने अपने अभिरान की शुरुआत हहमाचलि प्रदेश से की। अपने रोज़मराया के वरवहार के भलिए रात्रा के दौरान पलिाल्टक के बरतन, लिनहें एक बार उपरोग में लिाने के बाद फेंक हदरा िाता है, की िगह ्टीलि की बोतलि, और लिकड़ी से बना कॉफी का परालिा रखा। वे दांत मलिने के भलिए टूथपे्ट की िगह दंत मंिन का पाउिर और केश धोने के भलिए शैमपू की िगह साबुन का इ्तेमालि करती थीं। खाने के सामान के ख़ालिी पैकेट रा्ते में फेंकने की िगह एक कपड़े की थैलिी में िमा करती थीं ताकक परायावरण प्रदूत्रत न हो। इस प्रकार के सहि उपारों से परायावरण की देखिालि करना मल्लिका ने बचपन में अपनी दादी से सीखा था। दादी ककसी िी चीज़ को फेंकने की िगह उसका पुनरुƦार करके उसे कफर से उपरोगी बना लिेती थीं। उनकी साड़ी कहीं से फट िाए तो वे उसके साबुत हह्से को ननकालि कर उससे बचचों के कपड़े भसलि लिेती थीं। पहलिे हदन की बची दालि से अगलिे हदन आटा गूंध कर ्वाहदषट पराठें बना भलिरा करती थीं। घर की ककसी िी चीज़ की बरबादी उनहें ्वीकार नहीं थी। अब मल्लिका अपने बचपन में सीखे इस मू्रवान संदेश का परायावरण की सुरक्ा के भलिए प्रचार कर रहीं हैं। वे लिोगों को बताती हैं कक परायावरण-संरक्ण के उपार करने कहठन नहीं हैं केवलि अपनी सोच और आदतें बदलिने की ज़रुरत है। उदाहरण के भलिए मंिन और ्नान करते समर नलि के पानी को वरथया में न बहने दें और टेलिीत्वज़न, कमपरूटर आहद बबिलिी से चलिने वालिे रंत्रो का उपरोग करने के बाद उनके ल्वच बंद करें। उनको त्वशवास है कक अपने दैननक िीवन की आदतों और सोचने के तरीकों में पररवतयान लिाने से परायावरण की देखिालि पर सकारातमक प्रिाव पड़ सकता है।

Question paper, page 3

3 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 [कृपया पृƵ उलटें] 1 मल्लिका प्रसाद का चरन ककसभलिए ककरा गरा? …[1] 2 बचचों को पढ़ाते समर मल्लिका ्करा रोिना बना रहीं थीं? …[1] 3 मल्लिका ्टीलि की बोतलि और लिकड़ी के परालिे का उपरोग ककस त्वशेर कारण से करती थीं? …[1] 4 खाने की बबायादी को रोकने के भलिए दादी ्करा करती थीं? …[1] 5 पानी और बबिलिी की खपत कम करने के भलिए कौन से कदम उठाने चाहहएं? … …[2] [अंक:6]

Question paper, page 4

4 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 अभ्यास 2 प्रư 6 वादवववाद प्रवियोवििा में भाि लेकर भारि यात्ा का एक सुनहरा अवसर हौं्लिो हहंदी भशक्ा केंद्र 336 नेत्वलि ्कलिोज़ हौं्लिो, भमडिलिसे्कस टी िब्रू3 4िे िी दूरिार 00-44 20 86177335 ई मेलि: hhsk@yahoo.co.uk ढ़िंदी वयादवववयाद प्रनत्ोगगतया में भयाग िेिे के लिए सककूिी बच्े आवेदि करें। त्पछलिे वरया हुई वादत्ववाद प्रनतरोगगता की लिोकत्प्ररता को देखते हुए और इंगलिैंि में रहने वालिे ्कूलिी बचचों में हहंदी सीखने का उतसाह बढ़ाने के भलिए इस वरया िी एक वादत्ववाद प्रनतरोगगता आरोलित की िा रही है। सोमवार 24 अƠूबर और शननवार 29 अƠूबर को दो सत्रों में होने वालिी प्रनतरोगगता में दस से सोलिह वरया तक के बचचे िाग लिे सकते हैं। प्रनतरोगगरों की आरु के अनुसार दस से बारह वरया, तेरह से चौदह वरया और पनद्रह से सोलिह वरया की तीन अलिग-अलिग श्ेणणरां बनाई गई हैं। प्रतरेक श्ेणी में प्रथम आने वालिे प्रनतरोगी को िारत रात्रा का वापसी हटकट पुर्कार में भमलिेगा। कृपरा आवेदन पत्र के साथ हहंदी िारा सीखने के अपने अनुिव और अपने अभििावक की अनुमनत संलिगन करें। आवेदन पत्र िेिने की अंनतम नतगथ 10 अƠूबर है। साररका की उम्र 14 वरया है। त्पछलिे तीन वरषों से वह अपने घर के पास वालिे चचया हॉलि में हर शननवार को 10–12 बिे हहंदी सीखने िाती है। िबसे उसकी नानी िारत से आईं हैं वह उनके साथ हहंदी में बातचीत करती है और दूरदशयान पर बॉलिीवुि के भसनेमा देखती है। लिसके कारण उसे हहंदी बोलिने का अभरास तो हुआ ही उसका हहंदी का शबदज्ान िी बढ़ा है। हहंदी की परीक्ा में इस वरया कक्ा के 20 त्वƭागथयारों में उसका प्रथम ्थान आरा। उसकी भशक्क्का उसकी हहंदी की प्रगनत से बहुत खुश हैं। वह ईभलिंग अकादमी में पढ़ती है। 4 बिे ्कूलि से घर लिौटने पर गृहकारया करने के बाद कुछ और करने के भलिए रथेƴ समर नहीं बचता। भलिहाज़ा, सƯाह के दौरान वह प्रनतरोगगता में नहीं िाना चाहती। इसभलिए सƯाहांत में दोपहर का समर ही सवायागधक उगचत है। साररका लिंदन के वै्ट ईभलिंग इलिाके में 19 एमह्टया रोि, िब्रू5 3ए आर में रहती है, उसका ई-मेलि s.g@hotmail.com और उसका टेलिीफोन नमबर 020 85370208 है।

Question paper, page 5

5 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 [कृपया पृƵ उलटें] आप अपिे को सयाररकया मयािकर िी्े ढ़दए गए आवेदि पत्र को भररए। वहदी वादवववाद प्रवियोवििा हौं्लिो हहंदी भशक्ा केंद्र 336 नेत्वलि ्कलिोज़ हौं्लिो, भमडिलिसे्कस टी िब्रू3 4िे िी दूरिार 00-44 20 86177335 ई मेलि: hhsk@yahoo.co.uk आवेदक का नाम: साररका (सही का ननशान  लिगाएं) आरु 10–12 13–14 15–16 [1] ई-मेलि: s.g@hotmail.com पूरा पता: … [1] त्वƭालिर का नाम: … [1] ननमनभलिणखत त्वक्पों के माधरम से बताइए कक आप कब उपलिबध हैं। [कोƵक में सही का ननशान लिगाएं] सƯाह के दौरान। सƯाहांत में। [1] ननमनभलिणखत अवगधरों में से उगचत अवगध चुनें। [कोƵक में सही का ननशान लिगाएं] सुबह 9 बिे से दोपहर 12 बिे तक दोपहर 3 बिे से शाम 6 बिे तक [1] हहंदी िारा संबंधी अपनी उपलिलबधरों की कोई 2 िानकाररराँ दीलिए … … … [2] [अंक:7]

Question paper, page 6

6 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 अभ्यास 3 प्रư 7–9 ‘सवच्छ िि कया मित्व’ शीरयाक निमिलिखखत िेख पिें और अगिे पृƵ पर ढ़दए गए शीरयाकɉ के अंतगयात िोट बियाएं। त्वƳ में लिगिग एक अरब लिोगों को पीने के भलिए साफ़ पानी नहीं भमलिता। आंकड़ों के अनुसार हर आठ वरनƠ में से एक वरनƠ ्वचछ पेर िलि से वंगचत है। प्रतरेक वरया 315,000 बचचे दूत्रत पानी पीने के कारण हैिा, टारफारि आहद िैसी बीमारररों के भशकार होते हैं। रा रह कह सकते हैं कक प्रनतहदन 900 बचचे रा प्रनत दो भमनट में एक बचचे की अकालि मृतरु हो िाती है। पनƱम अफ्ीका में िनम से लिेकर पांच वरया तक की उम्र के बचचों की मृतरु का सबसे बड़ा कारण ्वचछ पेर िलि का अिाव है। रों तो पनƱम अफ्ीकी देशों में पानी की कमी का बुरा असर समाि में सिी पर होता है, पर इसका सबसे अगधक दुषप्रिाव ल्त्ररों और लिड़ककरों को सहना पड़ता है। उनको प्रनत हदन मीलिों पैदलि चलिकर नदी और पोखरों से पानी ढोकर लिाना पड़ता है। वह िी ऐसा पानी िो मनुषर के पीने लिारक िी नहीं होता और लिसे पीकर नाना प्रकार की बीमारररों का होना लिगिग नननशचत है। छोटी उम्र की लिड़ककरां सुबह के समर ्कूलि िाने की िगह अपना समर कड़ी धूप में मीलिों पैदलि चलिकर दूत्रत पानी ढोकर लिाने में वरतीत करती हैं। इसका बुरा असर उनके ्वा््थर और भशक्ा दोनों पर होता है। ऐसी ल्थनत में उनके सामने दो ही त्वक्प हो सकते हैं – दूत्रत पानी पीरें अथवा बबना पानी पीरे रहें। दोनों ही त्वक्प िीवन को संकट में िालि सकते हैं। पानी की कमी का प्रिाव लिोगों की िीत्वका पर पड़ता है। कृत्रप्रधान देश में फसलि उपिाने के भलिए पानी ननतांत आवशरक है। सूखा पड़ने अथायात भसंचाई के भलिए पानी न भमलिने से फसलि की बरबादी ककसान को गरीबी और िुखमरी के चंगुलि में दबोच सकती है। कुछ अंतरायाƶीर ्वरंसेवी सं्थाएं इस कहठन सम्रा को सुलिझाने की िरसक चेƴा कर रही हैं। उनका उƧेशर पीने के पानी का शुƦीकरण, गाँवों में कुएँ खोदकर ्वचछ िलि उपलिबध कराना, लिोगों को अपनी सहारता ्वरं करने की सीख देना आहद है। रहद प्रतरेक गाँव में टरूबवेलि से ्वचछ िलि भमलि सके तो वहाँ रहने वालिी ल्त्रराँ खेती में हाथ बटा सकेंगी और लिड़ककराँ ्कूलि िाकर अपनी भशक्ा पूरी कर सकेंगी। िूपेनद्र और हंसा पनƱम अफ्ीका के बुरकीना फासो गांव में तीस वरषों से रह रहे हैं। प्राथभमक ्कूलि के भशक्क के रूप में काम करते समर िूपेनद्र ने न िाने ककतने त्वƭागथयारों को दूत्रत पानी पीने से हुई बीमारररों का भशकार होते देखा था। नौकरी से अवकाश प्राƯ करने के बाद अपने देश िारत लिौट कर चैन का िीवन बबताने की िगह उनहोंने गाँव में रहकर अपनी बचत की पूंिी से ‘्वचछ िलि अभिरान’ शुरु ककरा। उनका उƧेशर आसपास के गाँवों में कुँए खुदवाना है ताकक गाँव की ल्त्ररों को गचलिगचलिाती धूप में दूत्रत पानी ढोकर लिाने के भलिए मीलिों पैदलि ना चलिना पड़े, लिड़ककरां अपनी भशक्ा पूरी करके आगथयाक रूप से ्वावलिमबी बन सकें और छोटे बचचे उस पानी को पीकर अकालि मृतरु का भशकार न बनें। वे िानते हैं कक उनका रह प्ररास एक अतरंत कहठन सम्रा को सुलिझाने के भलिए समुद्र में एक बूंद के समान है, लिेककन बूंद बूंद से ही तो समुद्र बनता है!

Question paper, page 7

7 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 [कृपया पृƵ उलटें] अभ्यास 3 प्रư 7–9 आपके सककूि में एक भयारण प्रनत्ोगगतया आ्ोलित की िया रिी िै। प्रनत्ोगगतया कया ववर् िै ‘सवच्छ िि कया मितव’। इस िेख में से िी्े ढ़दए गए प्रत्ेक शीरयाक के अंतगयात िोट लिखें लिस पर आपकया भयारण आधयाररत िोगया। 7 ्वचछ िलि की कमी से होने वालिे तीन दुषप्रिाव • … [1] • … [1] • … [1] 8 ्वचछ िलि उपलिबध कराने के उपार • … [1] • … [1] 9 सम्रा का समाधान करने में सहारक • … [1] • … [1] [अंक:7]

Question paper, page 8

8 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 अभ्यास 4 प्रư – 10 निमिलिखखत आिेख ‘रिस्म् सटोििेंि’ पिकर उसके अतीत और वतयामयाि कयाि में मित्व कया सयारयांश अपिे शबदɉ में लिखखए। आपकया सयारयांश 100 शबदɉ से अगधक ििीं िोिया ्याढ़िए। संगत बबनदुओं के समयावेश के लिए 6 अंक और भयावरक अलभव्नƠ के लिए 4 अंक निधयायाररत िैं। पयाठयांश से वयाक् उतयारिया उग्त ििीं िै। इंगलिैणि की त्व्टशारर काउंटी में एमसबरी से दो मीलि पनƱम और सॉ्सबरी से 8 मीलि उतिर में अवल्थत ्टोनहेंि एक अतरंत प्रभसƨ प्रागैनतहाभसक ्मारक है। अपने अƫुत पुरातालत्वक महत्व और अिूतपूवया ्मारकों के चक्ाकार िमघट के कारण सन 1986 में इसकी गणना ‘त्वƳ धरोहर ्थलि’ में की गई। पुरातत्व त्वशेरज्ों के अधररन के भलिए शोध का एक मू्रवान स्ोत ्टोनहेंि इंगलिैणि के प्रमुख दशयानीर ्थानों में से िी एक है। पतथरों से ननभमयात इस अिूतपूवया ्मारक का ननमायाण ईसा पूवया 2500–5000 की अवगध में अलिग-अलिग चरणों में हुआ माना िाता है। इसको बनाने के भलिए दूर-दूर से पतथर लिाए गए थे। नीलिे पतथर 150 मीलि दूर प्रेसलिी पहाड़ी से और सारसन के पतथर 19 मीलि दूर मलियाबॉरा से अपनी त्वशेर बनावट के कारण लिाए िाकर एक चक्ाकार ढांचे में ्थात्पत ककए गए थे। ्टोनहेंि की ्थापना कब, ककसने और ्करों की इस त्वरर में अनेक प्रकार की धारणाएँ हैं। उनमें िेननश रािाओं के राजराभिरेक का ्थलि, द्रात्वद मंहदर, सूरयाग्रहण की सूचना देने वालिा खगोलिीर रा जरोनतरशा्त्र का संगणक, पूवयािों की पूिा करने का मंहदर आहद प्रमुख हैं। कुछ लिोग ्टोनहेंि को रोगों से छुटकारा हदलिाने वालिा एक पत्वत्र ्थलि िी मानते हैं। पुरातालत्वक दृलषट से पतथरों से बना रह चक् एक अतरंत िहटलि ्मारक है। इसके पर्पर संबलनधत ्मारक नव-पाराण कालि के अंनतम िाग और कां्ररुग के लिोगों की िीवन पƦनत, त्वशेरकर इनमें दफ़नाए हुए 350 से िी अगधक समागधरों के टीलिे, मरणोंपरांत ककए िाने वालिे अंनतम सं्कार की प्रथा को समझने में सहारक हैं। खुदाई के समर वहाँ रोमन कालि के भमटटी के बरतन, पतथर और धातु से बनी चीिें और भस्कके भमलिे हैं। सामानरत: रह माना िाता है कक ्टोनहेंि सूरया की गनतत्वगध की सीध में बना एक प्रागैनतहाभसक मंहदर है। वरषों से ्टोनहेंि और पुरातन खगोलि त्वज्ान के समबनध का अधररन होता आ रहा है। सूरया, चनद्र और अनर ग्रहों के साथ इसके संबनध पर अनेक शोध कारया हुए हैं। ककया संक्ांनत अथायात गममी की ऋतु के समर रह ्मारक सूरयोदर की हदशा में और मकर संक्ांनत अथायात सददी की ऋतु में सूराया्त की हदशा में अवल्थत है। प्रनतवरया ककया और मकर संक्ांनत के समर सूरयोदर देखने के भलिए रहाँ हज़ारों लिोग एकबत्रत होते हैं। अतीत की उपलिलबधरों का रह एक अƫुत प्रतीक है। आधुननक रुग में इसके साथ एक त्वभशƴ प्रकार की धाभमयाक और सां्कृनतक महतिा िुड़ी हुई है िो लिोगों में त्व्मर, त्वनर और आदर की िावना िगाती है और लिसके कारण दूर-दूर से आने वालिे हज़ारों दशयाक इसकी ओर णखंचे चलिे आते हैं।

Question paper, page 9

9 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 [कृपया पृƵ उलटें] सयारयांश … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … [अंक:10]

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10 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 खंड 2 अभ्यास 5 प्रư 11–16 निमिलिखखत आिेख ‘केसर की खेती’ को ध्यािपकूवयाक पढ़िए और पकू्छे गए प्रưɉ के उत्तर दीलिए। खाना बनाने के मसालिों में केसर का एक त्वशेर ्थान है। केसर क्ोकस के बैंगनी रंग के फूलि के गहरे लिालि रंग के पराग के रेशे से बनता है। रह खाƭ वरंिनों के रंग और सुगंध में बढ़ोतरी करता है। क्ोकस के पौधे के ब्ब रा बीि िून के महीने में, िब सहदयारों के बाद सूरया की ककरणें धरती को गमया कर चुकी होती हैं, सूरि की हदशा में ढलिाउ, पोरस और उपिाऊ िमीन में बोरे िाते हैं। इसके पौधे को पनपने के भलिए सूरि की रोशनी और गमायाहट अनत आवशरक होती है। धूप की कमी से क्ोकस के फूलि में सुगंध की कमी हो सकती है। क्ोकस के पौधे 20–30 सेंटीमीटर तक बढ़ते हैं। प्रतरेक पौधे में तीन से चार तक फूलि णखलिते हैं और हरएक फूलि के पराग में गहरे लिालि रंग के तीन रेशे रहते हैं लिनहें एकबत्रत करके सुखाने पर केसर बनता है। क्ोकस के बैंगनी रंग वालिे फूलि अƠूबर मास के मधर से नवंबर के प्रथम सƯाह तक पूरी तरह से णखलि िाते हैं। शीघ्र ही फूलिों की कटाई शुरू हो िाती है। फूलिों को बेंत की िभलिरा में एकबत्रत करके उनके पराग की बाभलिरों रा रेशों को अलिग ककरा िाता है। फूलि का कोई िी हह्सा बेकार नहीं िाता। उसकी पंखुरररों की सबज़ी और िंठलि से िानवरों का चारा और गहरे लिालि रंग के रेशे से केसर बनता है। वज़न के हहसाब से केसर संसार के सबसे महंगे पदाथषों में गगना िाता है। केसर के अनेक उपरोग हैं लिनमें ईरानी, िारतीर, अरबी, टककयाश और रूरोत्परन पाकशैलिी के वरंिनों में केसरररा रंग और सुगंध का संचार करना मुखर है। इसके अनतरर्कत इसका प्ररोग कपड़े रंगने, सौंदरया-प्रसाधन बनाने, पारंपररक औरगध में मानभसक तनाव और त्वराद का इलिाज़ करने के भलिए और हहंदू एवं बौƦ धमया में धाभमयाक अनुƵान में ककरा िाता है। ईलिपट की महारानी ्कलिीओपेट्ा अपनी तवचा की सुंदरता बढ़ाने के भलिए ्नान के पानी में केसर घुलिवाती थीं। भसकंदर महान लिड़ाई में लिगे अपने घावों को िरने के भलिए ईरानी केसर का प्ररोग अपनी चार, चावलि और ्नान के िलि में करते थे। केसर की खेती सबसे पहलिे कहाँ शुरू हुई इस त्वरर में अलिग-अलिग मत हैं। संिवत: इसकी पहलि ग्रीस और उसके आसपास में हुई और वहां से दक्क्ण-पनƱम एभशरा और उतिरी अफ्ीका तथा अमेररका तक होने लिगी। सोलिहवीं शताबदी में पूवमी इंगलिैंि के गचलपपंग वॉ्िन नामक ्थान में केसर की खेती आरमि हो गई थी। वॉ्िन शहर केसर की खेती और वरापाररक केंद्र होने के कारण ‘सैफ्ॉन वा्िन’ के नाम से प्रभसƨ हो गरा। केसर की लिगिग 80% खेती ईरान में होती है। केसर की खेती के भलिए िारतवरया में िममू और कशमीर का प्रमुख ्थान है। श्ीनगर के समीप पामपुर में केसर की खेती होती है। ऐनतहाभसक सूत्रों के अनुसार िारतवरया में ईरानी शासक केसर के ब्ब रा बीि लिाए थे लिनहें पामपुर की धरती में बोरा गरा था। ककंतु एक कशमीरी भमथक के अनुसार दो त्वदेशी सूफ़ी संत, ख़वाज़ा मसूद वलिी और शेख शरीफुƧीन वलिी कशमीर आकर अ्व्थ हो गए थे। एक ्थानीर मुणखरा के इलिाज़ से ठीक हो िाने पर बदलिे में उनहोंने मुणखरा को केसर का ब्ब हदरा। आि िी केसर की कटाई के समर उन दोनों सूफ़ी संतों की ्मृनत में प्राथयाना की िाती है और पामपुर में उनकी रादगार में बना सुनहरा गुमबदाकार मक़बरा िी इसका प्रमाण है। ककंतु प्रभसƨ कशमीरी कत्व और त्वƮान रूसुफ़ तेंग के अनुसार रे दोनों ही बातें कहानी िर हैं।

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11 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 [कृपया पृƵ उलटें] कृप्या प्रư 11 से 14 तक के उत्तर सिी ्या ग़ित के कोƵक में  कया निशयाि िगयाकर दीलिए। ्ढ़द वयाक् ग़ित िै तो उसे पयाठयांश के आधयार पर ठीक कीलिए। सिी ग़ित उदाहरण – क्ोकस के फूलि लिालि रंग के होते हैं ।  औगचतर – क्ोकस के फूलि बैंगनी रंग के होते हैं। 11 क्ोकस के फूलि की पंखुरररों से केसर बनता है। … 12 केसर की खेती के भलिए पोरस, ढलिाउ और उपिाऊ भमटटी ज़रूरी होती है। … 13 केसर का उपरोग िोिन के वरंिन में रंग और सुगंध लिाने के भलिए होता है। … 14 क्ोकस के पराग से केसर ननकालिने के बाद फूलि को फेंक हदरा िाता है। … अब निमिलिखखत प्रưɉ के उत्तर दीलिए। 15 भसकंदर महान ने केसर का उपरोग ककसभलिए ककरा? …[1] 16 कशमीर में सूफी संतों Ʈारा केसर के ब्ब लिाने की मानरता के दो प्रमाण भलिणखए। … …[2] [अंक:10]

Question paper, page 12

12 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … … अभ्यास 6 प्रư 17 ‘सककूिɉ में संगीत और किया की अपेक्या ववज्याि और गखणत के ववर् िी मित्वपकूणया िोिे ्याढ़िएं।’ इस ववर् पर अपिे वव्यार व्Ơ करते िुए अपिे सककूि की पबत्रकया के लिए एक िेख लिखखए। आपकया िेख ववर् की ियािकयारी पर केंढ़रित िोिया ्याढ़िए। आपकया िेख 150 से 200 शबदɉ से अगधक ििीं िोिया ्याढ़िए। लिखखत वववरण पर अंतयावसतु के लिए 10 अंक और सटीक भयारया के लिए भी 10 अंक निधयायाररत िैं।

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13 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 … … … … … … … … … … … … [अंक:20]

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16 0549/01/O/N/18 © UCLES 2018 Permission to reproduce items where third-party owned material protected by copyright is included has been sought and cleared where possible. Every reasonable effort has been made by the publisher (UCLES) to trace copyright holders, but if any items requiring clearance have unwittingly been included, the publisher will be pleased to make amends at the earliest possible opportunity. To avoid the issue of disclosure of answer-related information to candidates, all copyright acknowledgements are reproduced online in the Cambridge International Examinations Copyright Acknowledgements Booklet. This is produced for each series of examinations and is freely available to download at www.cie.org.uk after the live examination series. Cambridge International Examinations is part of the Cambridge Assessment Group. Cambridge Assessment is the brand name of University of Cambridge Local Examinations Syndicate (UCLES), which is itself a department of the University of Cambridge. BLANK PAGE